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वैश्विक महामारी कोरोनावायरस संक्रमण को लेकर जहां एक ओर लोगों के कामकाज बंद है वहीं रोजमर्रा के कामकाज पर गुजर-बसर करने वाले लोगों के बीच में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है मुख्य रूप से गांव में रहकर रोजी रोटी कमाने वाले मनरेगा मजदूरों के बीच में मनरेगा कार्य योजना के तहत नियमित रूप से कार्य नहीं मिलने के कारण ऐसे मनरेगा मजदूरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ऐसे ही एक मनरेगा मजदूर बिष्णुगढ़ प्रखंड के मड़मो ग्राम निवासी से मोबाइल वाणी संवाददाता राजेश्वर महतो ने किया वार्ता विस्तारपूर्वक सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
कोरोना महामारी और उसके बाद सम्पूर्ण भारत में ताला बंदी संगठित व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए कहर बरपा रही है, प्रवासी श्रमिक जो देश के नागरिक भी हैं अपने आँखों में उम्मीद लिए अपनों से मिलने की आस में थके हारे घर पहुँच तो गए लेकिन पहुँचने के बाद भी परेशानी पीछा नहीं छोडती नज़र आई। आप में से बहुत से शर्मिक ऐसे होंगे जिन्हें अपने घर पर ही 14 दिनों के लिए कोरनटाईन में रहने का सलाह दिया होगा और आपके लिए भी राशन कार्ड और खाद्यान्न मिलना सुनिश्चित होना चाहिए, लेकिन क्या सच में आप को इन सभी सुविधाओं का लाभ मिला? क्या अब तक आपको मनरेगा में काम मिला और राशन उपलब्ध कराया गया या राशन की दुकान से आपने राशन प्राप्त किया? काम और राशन न मिलने की मुख्य वजह क्या रही हैं? हम यह भी जानते हैं की आपको इनके इसके अलावा और भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रह रहा होगा तो इन परेशानियों को अपने आप तक न रखें , मोबाइल वाणी पर साझा करें, 3 नम्बर दबाकर रिकॉर्ड करें
कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के बाद काफी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर लौट गए हैं। ऐसे में उन्हें रोजगार की सख्त जरूरत है। प्रवासी मजदूर अब भूखमरी से राहत के लिए स्थानीय स्तर पर काम की तलाश कर रहे हैं ताकि उनकी रोजी-रोटी चल सके। इसी विषय पर मोबाइलवाणी संवाददाता मिथिलेश कुमार बर्मन से बात कर रहे हैं प्रवासी मजदूर चंद्र रविदास
देश में कोरोना महामारी के फैलते हीं प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटने लगे हैं। ऐसे में वे गांव में ही रहकर मजदूरी करना चाहते हैं। उनके लिए मनरेगा एक बेहतर विकल्प है। इसी विषय को लेकर मोबाइलवाणी संवाददाता मिथिलेश कुमार बर्मन को बता रहे हैं मनरेगा मजदूर सूरज मुर्मू।
कोरोना संक्रमण के बाद कई मजदूर रोजगार से वंचित हो गए हैं। ऐसे में वह मनरेगा से जुड़कर मजदूरी करना चाहते हैं। इसी विषय को लेकर मोबाइल वाणी संवाददाता मिथिलेश कुमार बर्मन को बता रहे हैं मनरेगा मजदूर मीना देवी
लॉकडाउन के कारण गिरिडीह में फंसे 30 मजदूर अपने घर गुमला के लिए साइकिल से ही रवाना हो गए। यह सभी दो महीने पहले ईट भट्ठा में काम करने के लिए गिरिडीह गए थे। लेकिन लॉकडाउन के कारण फंस गए। इन्होंने सोचा की छूट मिलते ही वह घर को निकल लेंगे, लेकिन इसमें एक माह से भी ज्यादा का समय बीत गया। जिसके बाद सभी मजदूर साइकिल पर ही पत्नी व बच्चे को बिठाकर घर के लिए रवाना हो गए। टाटीझरिया से गुजरने के क्रम में उन्होंने बताया कि हम लोग रोजी रोजगार के लिए वहां गए थे। घर में मां बाप और परिवार वालों की चिंता सताने लगी तो साइकिल के सहारे निकल पड़े हैं। चार दिन में घर पहुंच ही जाएंगे। मजदूरों में सुभाष, अरनव, बबलू लखन सुमन, आकाश, सुरेंद्र, फूलचंद, सुगनी, बसंती समेत 30 लोग एक साथ चल रहे थे।
टाटीझरिया संवाददाता मिथिलेश कुमार वर्मन ने मुंबई से लौटे प्रवासी मजदूर विजय राम के साथ समस्याओं को लेकर किया साक्षात्कार
लॉकडाउन की समस्याओं को लेकर मोबाइलवाणी के विष्णुगढ़ संवाददाता राजेश्वर महतो ने एक प्रवासी मजदूर के साथ साक्षात्कार किया।
लॉकडाउन की समस्या को लेकर महाराष्ट्र से लौटे प्रवासी मजदूर आकाश कुमार के साथ मोबाइलवाणी संवाददाता मिथिलेश कुमार बर्मन के साथ साक्षात्कार के अंश
