उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 45 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को अगर जमीन का अधिकार मिलता है तो उनका परिवार और ज़्यादा सुरक्षित होगा तथा परिवार मज़बूत भी बनेगा। महिलाओं के नाम जमीन नहीं रहता है तो उनका महत्व नहीं रहता है। अगर महिला के नाम जमीन होगा तो वो सुरक्षित और मज़बूत बनेगी।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भारत में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी भी लैंगिक भेदभाव और कई रूढ़िवादिता मौजूद हैं। महिला सशक्तिकरण केवल महिला को मजबूत बनाना ही नहीं बल्कि उन्हें समाज में प्रतिकारी रूप में स्थापित करना भी है। महिला को हर प्रकार का अधिकार मिलना चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भारत में महिलाओं को जमीन पर कई अधिकार प्राप्त है। लेकिन कई जगहों पर ऐसा नहीं हो पाता है।शादीशुदा बेटी को कृषि भूमि पर अधिकार नहीं मिलता था। लेकिन अब सरकार कानून पूरे देश में लागू कर रही है। सभी प्रकार की पैतृक संपत्ति पर अब महिला को भाइयों के बराबर हिस्सा मिल सकता है।बेटियों को पिता की पैतृक संपत्ति में भी हिस्सा मिलता है।मृत्यु के बाद पति के संपत्ति में माँ और बच्चे को बराबर की हिस्सेदारी मिल रही है। महिला कोई संपत्ति खुद खरीदती है या वसियत या उपहार के रूप में प्राप्त करती है। वह पूरी तरह से उनकी होती है और वो उसे अपने इच्छा के अनुसार बेच सकती हैं। तलाक के बाद गुजारा भत्ता या सम्पति में हिस्सा मिल सकता है।बेटी को पैतृक घर में रहने का अधिकार प्राप्त है, भले ही वो अविवाहित हो। पत्नी की संपत्ति पर पति का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है। कोर्ट के फैसले के बाद पति को भी पत्नी की संपत्ति जैसे गहने व धन वापस करने पड़ते है,लेकिन महिला की संपत्ति अपनी मानी जाती है

कुल मिलाकर, महिलाओं के लिए संयुक्त स्वामित्व सिर्फ़ काग़ज़ी नियम नहीं है, बल्कि समाज को बदलने का एक मज़बूत ज़रिया है। यह महिलाओं को मज़बूत बनाता है, परिवार में संतुलन लाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बराबरी की एक अच्छी मिसाल पेश करता है। महिलाओं को ज़मीन और संपत्ति में बराबर हक़ देना एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की ओर बड़ा कदम है। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- क्या आपके परिवार की ज़मीन या घर महिलाओं के नाम पर भी संयुक्त रूप से दर्ज है? *--- अगर नहीं, तो क्या आप संपत्ति में बेटियों और बहुओं को बराबर अधिकार देने पर विचार करेंगे? *--- क्या आप मानते हैं कि महिलाओं को ज़मीन का अधिकार मिलने से परिवार ज़्यादा सुरक्षित और मज़बूत होता है? *--- क्या अगली पीढ़ी को बराबरी की सीख देने के लिए आप संयुक्त स्वामित्व अपनाना चाहेंगे?

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रोता से हुई। श्रोता कहते है कि महिलाओं को उनके मायके में हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। महिलाओं को उनके ससुराल में ही जमीनी हक मिलना चाहिए।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र निर्माण और उपयोग की जानकारी दे रहे हैं ।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 45 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं के पास ऐसे जमीन होते है जो पट्टा सम्बंधित खाली जमीन होता है। और इसकी जानकारी महिलाओं को नहीं होती है कि पट्टा में नाम कैसे चढ़ेगा ।इसलिए जानकारी के अभाव में महिलाएँ जमीनी हकदार नहीं बन पा रही है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि हमारे देश में कानून तो बना हुआ है पर महिलाओं को भूमि अधिकार तब ही मिलेगा जब हम अपनी सोच बदलेंगे। केवल कानून होने से कुछ नहीं होता। कानून तब काम करता है जब घर के लोग उसे मानते है। जब बेटी का नाम जमीन पर जोड़ते है तो लोग बेटी पर भरोसा दिखाते है इससे यह होता है कि महिला के साथ पूरा परिवार बदलता है और धीरे धीरे समाज भी। जब महिला मज़बूत होती है तब देश भी मज़बूत होता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि अक्सर बेटियों से कहा जाता है कि जायदाद में हिस्सा छोड़ दो तो घर में शांति रहेगी पर क्या हक़ छोड़ना ही अच्छाई होती है। बेटी को भावुक कर हस्ताक्षर करवा दिया जाता है और बाद में कहा जाता है कि वो अपने मन से हिस्सा छोड़ी है।बेटी का भूमि पर उतना ही हक़ है जितना बेटे का। बेटी अपना हक़ लेती है तो वो लालची नहीं होती वो केवल बराबरी होती है। असली संस्कार ये है कि बेटियों को बिना माँगे उनका हक़ मिल जाए

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि बहुत सी महिलाओं को अत्याचार इसलिए सहना पड़ता है क्योंकि उनके पास रहने के लिए ज़मीन नहीं होता। जब महिला के पास अपनी भूमि होती है तो वो गलत के खिलाफ खड़ी हो सकती है ,वो मज़बूर नहीं रहती। जमीन ,जायदाद जिन महिलाओं के पास होता है उनके साथ हिंसा का मामला भी कम होता है। जमीन केवल कागज़ का मामला नहीं है ये महिलाओं की ज़िन्दगी बचाने का ज़रिया भी है।