उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बस्ती से अरविन्द श्रीवास्तव , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि भारतीय समाज में महिलाएं अक्सर अपने परिवार और समुदाय के बिच में रह जाती है, क्यूंकि उनको पहले ही समझा दिया जाता है कि उनको परिवार और समुदाय के बिच में रहकर काम करना है। महिलाओं को कोई भी अधिकार नहीं दिया जाता है, उनको सभी अधिकारों से वंचित रखा जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार महिलायें सिर्फ घर का काम ही देखेगी उनको बाहर के कामों से कोई मतलब नहीं रहता था लेकिन अब लोगों की जरूरत इतना बढ़ गया है जिसके महिलाओं को भी शसक्त होना जरूरी हो गया है। बच्चों का पढ़ाई का खर्चा बहुत बढ़ गया है और एक व्यक्ति के कामो से घर नहीं चलता है। जहाँ महिला जागरूक है वो बहार का काम कर रही है और पति भी उनका साथ देते है। महिलाओं को जमीन के बारे में कुछ पता नहीं होता है जिसके कारण उनके नाम से जमीन नहीं मिलता है।

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उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बस्ती से रमजान अली , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार मिलना चाहिए। जो लोग महिलाओं को सम्मान की नज़र से नहीं देखते है तो वह अशिक्षा का शिकार है। जिस तरह से पुरुषों का संपत्ति पर अधिकार होता है उसी तरह महिलाओं का भी होना चाहिए। आपस में भेद भाव नहीं होना चाहिए। जिस तरह से पुरुषों का सम्मान होता है उसी तरह महिलाओं का सम्मान होना चाहिए। महिलाओं के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।

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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती जिला से मोहम्मद इमरान ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद महिलाओं को भूमि स्वामित्व का अधिकार देने में पीछे क्यों है, महिलाओं को उनका हक नहीं दिया जाता है। कानूनी रूप से या संसद भवन में महिलाओं के आरक्षण के लिए सभी प्रकार के कानून बनाए जाने के बावजूद पुरुष अधिकार नहीं देना चाहते हैं। लेकिन एक पुरुष प्रधान देश में महिलाओं के लिए अपने अधिकारों तक पहुँचना मुश्किल साबित हो रहा है। सेज स्टाम्प पेपर के नाम पर या भंडार में छूट पाने के लिए जमीन उनके नाम पर लिखी जाती है, लेकिन इसका स्वामित्व उनके परिवार के सदस्यों के पास रहता है। ऐसे में हमें जागरूक होने की जरूरत है और महिलाओं को भी अपने अधिकारों को समझने की जरूरत है, तभी हम महिलाओं को उनके अधिकार दे सकते हैं।