उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से दीपा मोबाइल वाणी के माध्यम से यह कहती हैं कि किशोरों को बारह साल के बाद या अठारह साल के बाद उनके अंदर चिड़चिड़ापन आने लगता है और वो अपने आप को अकेला महसूस करने लगते हैं
गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू आलू के फसल में लगने वाला झुलसा रोग का उपचार की जानकारी दे रहे हैं ।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 40 वर्षीय मोहम्मद सलीम मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को माता पिता की संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए। अगर महिला का तलाक हो जाता है तो अगर संपत्ति में हिस्सा मिला रहेगा तो वो अपना जीवन यापन अच्छे से कर लेगी और उसे कही भटकना नहीं पड़ेगा
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 38 वर्षीय मोहम्मद आरिफ मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को माता पिता के संपत्ति में महिलाओं को अधिकार मिलना चाहिए या नहीं यह बहुत बड़ा मुद्दा है। महिलाओं को माता पिता के संपत्ति में एक तिहाई हिस्सा मिलना चाहिए ताकि उनका जीवन यापन अच्छे से हो सके।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को जमीन मिल रहा है। बहुत लोगों का सोच है कि महिलाओं की शादी हो जाती है तो वो अपने पति का जमीन में हिस्सा लें। अगर ऐसा नहीं होगा तो भाई और बहन में टकरार हो सकती है। अगर वही अविवाहित महिला जिनके पिता किसी कारणवश नहीं रहते है तो उनके जमीन का अधिकार पुत्र के साथ साथ पुत्रियों को भी मिलना चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अरविन्द श्रीवास्तव कहते हैं कि महिलाओं को जमीन देने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। लेकिन हमारे समाज में लोग आज भी पुरानी रुढ़िवादी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जिसके कारण महिलाओं को उनका हक नहीं मिल पाता है। सरकार कितना भी प्रयास कर लें। लेकिन हकीकत में महिलाओं को उनका हक बहुत कम ही मिल पाता है। महिला अक्सर अपने अधिकार को मांगने के कारण घरेलू हिंसा का भी शिकार हो जाती है। क्योंकि भाई या पिता काफी नाराज होते हैं और अपनी बहन या बेटी को हिस्सा नहीं देना चाहते हैं। इसके लिए एक बदलाव की जरूरत है और उनको ये बताने की आवश्यकता है की वो भी उसी परिवार की बेटी है उसके लिए भी जमीन देना आवश्यक होता है। जिससे की उसके पति की मृत्यु के बाद वो आर्थिक रूप से मजबूत रहे
उत्तर प्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से मोबाइल वाणी के माध्यम से संवाददाता रमजान अली ने रुबी कुमारी से साक्षात्कार लिया जिसमें उन्होंने जानकारी दी की जैसे पुरुषों को जमीन जायदाद में हक मिलता है। वैसे ही महिलाओं को भी हिस्सा मिलना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि लोगों की सोच है कि जमीन बेटा ले जाएगा ,बेटी को कुछ नहीं देंगे। देंगे तो भी दहेज़ के रूप में कुछ सामान दे दिया जाएगा। जबकि असलियत में संपत्ति में बेटी का भी उतना ही हक़ है जितना बेटा का है। जब बहु ससुराल आती है तो वो वहाँ भी मेहनत से घर संभालती है।इसलिए जमीन में महिला का नाम होना एक अहसान नहीं इन्साफ है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि हमारे समाज में महिला का नाम राशन कार्ड आधार कार्ड पर होता है लेकिन जमीन के कागज़ों में नहीं होता है। जबकि कानून कहता है कि महिला को भी बराबर का भूमि का अधिकार है। अगर घर की जिम्मेदारी ,बच्चों की भविष्य की प्लानिंग खुद करती है तो अगर उनके नाम जमीन हो तो वो अच्छे से फैसला ले पाएगी। सारे मेहनत का काम महिला करती है लेकिन मुखिया हमेशा पुरुष को समझा जाता है। इस मानसिकता को बदलना चाहिए ताकि घर और मज़बूत बन सके
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 49 वर्षीय राकेश श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होने से जमीन सुरक्षित होता है। पुरुष वर्ग में अधिकतर लोग नशाखोरी के कारण जमीन को इधर उधर कर देते है जिससे वो गरीबी में जीवन यापन करने को मज़बूर हो जाते है। लेकिन महिलाओं के नाम जमीन होने से ऐसा नहीं होता है। इस प्रकार वो अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान देती है
