Which are the laws that protect women and children
हेलो मैं सदर थाना ग्राम पंचायत बिकानी से सुरक्षा सखी गिन्नी कुमारी, हमारी ग्राम पंचायत में बहुत पहले एक कच्ची शराब का मुद्दा उठाया गया था जो कि कुछ टाइम के लिए बंद हो गया उसके बाद वह फिर स्टार्ट हो गया अब हम लोगों ने एस.आई. सर के साथ मिलकर और ग्राम समुदायिक महिलाओं से मिल कर के हम लोगों ने इसकी रैली और इसके ऊपर कार्यवाही की जिसके ऊपर अब ग्रामीण लोगों के सहयोग से अब यहां पर कच्ची शराब नहीं बिक रही और एएसआई सर ने बहुत सहयोग दिया जो कि अब 1 हफ्ते से यहां पर ऐसा कोई भी कार्य नहीं हो रहा है
मेरा नाम कविता है, मैं बहतुकला थाना में सुरक्षा सखी के रूप में कार्य करती हूं मेरा गांव सहाड़ी है जिसमें सरकारी स्कूल में मैडम का नहीं होना, जिससे छात्राएं अपनी गुप्त बात रख सके और दूसरा शौचालय में पानी का नहीं होना, जिससे लड़कियाँ बहुत परेशान होती है चारों दीवारों का छोटा होना, जिसके कारण बच्चे बाहर कूद कर चले जाते हैं जिससे तस्करी की संभावना है चौथी बात स्कूल के सामने दुकान का होना जिस पर लड़के बहुत सारे खड़े रहते हैं हरदम, हम इस समस्या को लेकर सब सुरक्षा सखियों ने थानेदार के साथ में मीटिंग की जिसमें हमने एक पत्र लिखकर थानेदार को दिया, थानेदार से बोले कि सर हमारे गांव के स्कूल में यह समस्या है , थानेदार ने हमें आश्वासन दिलाया कि हम इस पत्र पर जल्दी ही कार्य करेंगे और थानेदार ने भी यह कार्य करने के लिए एक पत्र लिखा और पत्र थानेदार ने प्रिंसिपल को दे दिया है, अब कुछ ही दिनों में हमारा कार्य चालू होने की संभावना है, मैं सभी से यही चाहती हूं कि इस पर सुरक्षा सखियां सब मिलकर काम करें धन्यवाद
मेरा नाम नर्मदा है, मैं खुशखेड़ा थाने की सुरक्षा सखी में हूँ, मैंने अभी पिछले महीने सुरक्षा सखी की मीटिंग ली थी, ट्रेनिंग में हमने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर के कैसे मीटिंग करनी है, समस्याओं के रोकथाम को लेकर कैसे काम करना है, यह भी सीखा था, पिछले सप्ताह हमारे थाने में मीटिंग रखी थी, उस समय हमारे गांव में एक महिला अपने पति से बहुत परेशान थी, मेरी उस समय उस महिला से बात हुई उसने बताया कि मेरा पति मुझे बहुत परेशान करता है मारता हैं, घर के खर्चे नहीं देता है, दूसरों के घर से राशन लाना पड़ता है, और घर से बाहर कर देता है, तब मैंने उस महिला से पूछा कि आपको पुलिस की मदद चाहिए तो आज हमारी मीटिंग है, मै एस.एच.ओ. साहब से बात करूंगी, अपनी परेशानी एस.एच.ओ. साहब से बताना, उस महिला ने अपने नंबर दिए और मदद के लिए अनुरोध किया, मैं थाने में गई और जब हमारी मीटिंग हो गई, तो मै थाना अधिकारी को उस महिला के बारे में पूरी बात बताइ, और थाना अधिकारी को उस महिला से बात कराई, थानाधिकारी ने उस महिला से बात किया और उसको बोला कि तू अपने घर जाओ मैं स्वयं तुम्हारे पति से बात करूंगा, उसके बाद पुलिस उसके घर आई और उसके पति से बात किया, मुझे उस महिला की मदद करके बहुत अच्छा लगा धन्यवाद।
मैं ममता बोल रही हूं डूंगरगढ़ बीकानेर जिले से, मैंने कल पुकार की मीटिंग रखी थी जिसमे मैंने सुरक्षा वाणी के बारे में और सुरक्षा सखी के बारे में बताएं सभी को और मेरे को मीटिंग लेकर बहुत अच्छा लगा.
मैं उदयपुर, हिरण मगरी सेक्टर 6 थाने से हूं, मेरा नाम भावना है और मैं यहां उदयपुर से, एक लेडिस आई थी, लीला पटेल करके, जो कि लव मैरिज करा हुआ था, उसने समाज में ही किया था लेकिन उसके हस्बैंड ने एक बच्चा होने के बाद उसको छोड़ दिया, और वापस से उसी लेडीस के साथ चला गया था और उस महिला को उसके समाज वालों ने बाहर कर दिया था समाज से, तो वह इस हालत में आ गई कि वह सड़कों पर अपने बच्चो को ले लेकर घूम रही थी, डेढ़ साल का बच्चा भी था उसके पास, और उसको किसी ने हमारे एनजीओ का पता दिया, वह हमारे पास आयी फिर मैं उसको थाने में लेकर गए थे तो थाने से उस महिला को हमने वहां से उसको पता किया कि वह महिलाओं को रखने की कही पर जगह है या नहीं, और जो हमारे एन जी ओ की ओर से ₹1000 पर मंथ हम ऐसी लेडीस को देते हैं जो वाकई में सहायता है, उनको जरूरत है तो उसको मैंने वहां से स्टार्ट करवा दिया था, तो वो उसको जा ही रहा है, तभी मैंने उसके अकाउंट खुलवा दिया था, ताकि उसका पैसा हर महीने ऑटोमेटिक उसके अकाउंट में चला जाये, तो उसको भागदौड़ न करनी पड़े, फिर मैंने सको यहाँ जो महिला थाना है, वहां पर हमने महिला थाने पर भेजा उसको और वहां उसको रखा गया 4 से 5 दिन, फिर उसको वहां से मुस्कान संस्था जो महिलाओं के लिए है, डूंगरपुर में, वहां पर उसको लाया गया, तो अभी उसके पास ठिकाना है रहने का, तो अभी वह लेडिस शायद वही पर है क्योंकि मेरी अभी 2 महीने से बात नहीं हुई, तो ऐसी महिलाएं जिनको वाकई में जरूरत है सुरक्षा की, या जिनको समाज बहिष्कृत कर देता है, तो उनको हम हेल्प करने के लिए सुरक्षा से जुड़े हुए हैं धन्यवाद।
मेरा नाम खुशनूर खा है, मै सराड़ा थाना से सुरक्षा सखी हूँ, और मैंने मैंने बच्चों के लिए मुद्दा उठाया था, की स्कूल के पास में आवारा बच्चे घूमते हैं, जो मोबाइल वगैरा और गाना बजाना, सीटी बजाना वगैरा करते थे तो मैंने यहाँ पेट्रोलिंग के लिए थाना में बात की थी, रतन जी और मधु जी को, तो उन्होंने पेट्रोलिंग की और पेट्रोलिंग करने के बाद यह बहुत हद तक यह समस्या रुकी, गर्ल्स स्कूल में हॉस्टल भी है लड़कियों का, तो लड़कियां पढ़ने जाती है तो डरती है, वहां सब लड़की बैठे रहते हैं तो पेट्रोलिंग होने के बाद में यह कम हो गया है, तो अभी वापस शिकायत नहीं आयी है, सुरक्षा सखी के रूप में मैंने यह काम किया मुझे बहुत अच्छा लगा, धन्यवाद।
नमस्कार मैम, मै बीकानेर जिले के ब्लॉक खाजूवाला से सुरक्षा सखी बोल रही हूं, हमारी मीटिंग हर माह होती है पुलिस थाने के अंदर, और हमने एक मुद्दा उठाया था, कि लड़कियों की सुरक्षा के लिए हमें क्या करना चाहिए तो वह पुलिस सर ने हमारे वहां स्कूल के आसपास गश्त की और हम भी उसमे साथ गए थे, पुलिस की गश्त से यह होता है की आवारा जो बच्चे घूम रहे हैं वह उनके डर से स्कूल के आसपास नहीं घूमे। थैंक यू धन्यवाद
नमस्कार, मैं डॉक्टर अर्पिता गुप्ता बीकानेर राजस्थान से, हम अपने संस्थान द्वारा निजी स्तर पर महिलाओं को बच्चियों को सुरक्षा के अधिकारों के प्रति पिछले कई वर्षों से जागरूक कर रहे हैं, पर सुरक्षा सखी ने हमें अलग ही हिम्मत और ताकत दी है क्योंकि इसके द्वारा हमें अपने यहां जो आसपास के पुलिस थाने हैं और जो सुरक्षा से संबंधित संस्थाएं हैं उनसे जुड़ने का अवसर मिला और इसके कारण हम और बेहतर कार्य कर पा रहे हैं तो सबसे पहले तो मैं सरकार की इस योजना के लिए और इससे जुड़े सभी जो सदस्य हैं स्पेसिअली जयपुर के संस्थान है आंगन, उनकी सारे कार्यकर्ताओं को और बीकानेर के जो पुलिस थाने के सारे जो पुलिस ऑफिसर है, हम सब का धन्यवाद देना चाहूंगी, जैसे मैं आपको बताना चाहूंगी, हम निःशुल्क बच्चों को शाम को पढ़ाते हैं और बहुत सारी बच्चियां हमारे पास आती है, जब वह वापस अपनी बस्ती में जा रही थी कुछ दिनों पहले की बात है तो कुछ असामाजिक तत्व उन्हें परेशान कर रहे थे, जब हमने थाने में यह कंप्लेंट करवाई तो उन्होंने जाके उनके लिए एक्शन लिया और उनको डराया जिससे कि आज हमारी बच्चियां सुरक्षित है तो मैं सरकार की इस योजना, जो कि देखिये कई कई बार कुछ योजनाएं बनती हैं पर वह लंबे समय तक चल नहीं पाती है पर इस योजना में लगातार मै देख रही हूं कि हर महीने हमारी मीटिंग हो रही है हर महीने अपडेट लिया जा रहा है कि कौन कहां पर कैसा कार्य कर रहा है जिससे कि हमारे राजस्थान में महिलाएं हर तरह से सुरक्षित रहे तो इसके लिए मैं सरकार को बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूं कि यह बहुत अच्छा प्रयास है महिला की सुरक्षा के लिए, हर शाम को आपके संस्थान द्वारा फ़ोन आता है, हमें सारी जानकारी दी जाती है हमारे अधिकारों के और कर्तव्यों के बारे में, तो मैं उसके लिए भी आभार व्यक्त करती हूँ.
नमस्कार, मैं डॉ अर्पिता गुप्ता, बीकानेर राजस्थान से, मैं अपने निजी संस्थान द्वारा बच्चों व महिलाओं को शिक्षित करने का कार्य कर रही हूं, और सुरक्षा सखी वाणी इस कार्यक्रम में, हमारे इस महिलाओं के प्रति जो हम उनको शिक्षित करने का मुख्य उद्देश्य था, कि वह अपने लिए कोई उनके साथ कुछ गलत हो तो वह अपने लिए खड़ी हो सके और इस कार्यक्रम में सुरक्षा सखी ने हमें जो आम महिलाएं हैं उनको जो हिम्मत दी है उसके लिए मैं इस योजना का धन्यवाद देना चाहूंगी क्योंकि हम महिलाएं अपनी बात कहने से डरते हैं पुलिस जाने से अभी इससे आपको अपने साथ एक निजी एक्सपीरियंस शेयर करना चाहूंगी, की मैं जैसे बच्चों को शाम को बस्ती के बच्चियां आती थी उन्हें पढ़ाती हूं शाम को, तो जब वो वापस जाती थी, तो उनको कुछ लोग असामाजिक तत्व परेशान करते थे और सुरक्षा सखी के तहत जब हमने अपने पास के थाने में पुलिस को इस बारे में बताया तो उन्होंने हाथों-हाथ ऐक्शन लिया उन लोगों को जाकर डराया और बताया कि भाई अगर आप बच्चो को परेशान करेंगे तो हम आप को जेल में डाल देंगे तो इससे डर के वह लड़के उन्होंने ऐसा करना बंद कर दिया तो यह बहुत अच्छा सरकार की पहल है हम महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए और मैं आभार व्यक्त करती हूं कि आपकी पूरी टीम का जो इतना हमें सहयोग कर रही है एक यही योजना है जो निरंतर चली जा रही है और इसका बहुत ज्यादा उपयोग करके हम महिलाओं को बहुत शक्ति मिली है हम और महिलाओं की सुरक्षा के लिए काम कर पा रहे हैं और हमें सच में थाने के लोग भी बहुत सहयोग दे रहे हैं तो मैं सरकार का बहुत तहे दिल से धन्यवाद देना चाहती हूं जो इस योजना को अपने महिलाओं के लिए शुरू किया बहुत-बहुत धन्यवाद
