बिहार राज्य से शिव को साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहिए कि मनरेगा का जॉब कार्ड कहाँ और कैसे बनता है? किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत पड़ती है ? मनरेगा के तहत कार्य के कितना वेतन भुगतान किया जाता है ?साथ ही मनरेगा जॉब कार्ड के क्या फ़ायदे है ?
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आपको बताना चाहते हैं कि मनरेगा-जॉब कार्ड के लिए आपको ग्राम प्रधान के पास आवेदन देना होगा, जिसके बाद आपके आवेदन को ग्राम प्रधान आवश्यक कार्यवाही के लिए पंचायत सचिव के पास भेजेगा। अगर किन्हीं कारणों से ग्राम प्रधान आपका जॉब कार्ड बनवाने में टालमटोल करते हैं, तब आप सीधे पंचायत सचिव को अपना आवेदन दे सकते हैं। अगर पंचायत सचिव भी किन्हीं कारणों से आपका जॉब कार्ड बनवाने में टालमटोल करते हैं, तब आप अपना आवेदन सीधे ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफ़िसर के पास दीजिए। ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफ़िसर आपके आवेदन को अग्रसारित कर पंचायत सचिव को भेज देंगे। तब पंचायत सचिव के लिए आपका जॉब कार्ड बनवाना मजबूरी हो जाएगी। आपके आवेदन से समबंधित आवश्यक कार्यवाही कर पंचायत सचिव उसे वापस ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफ़िसर के पास भेजेंगे, जहाँ आपके आवेदन की ऑनलाइन फ़ीडिंग कर आपको एक यूनिक जॉब कार्ड नम्बर जारी किया जाएगा, जिसकी मदद से आप भारत में कहीं भी मनरेगा के तहत काम पाने के हक़दार हो जाएँगे। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया के लिए आपको अपने आवेदन के साथ आधार और राशन कार्ड, तथा अपने मतदाता पहचान पत्र की छायाप्रति लगानी होगी। अगर बैंक खाता है तो बेहतर, नहीं तो खुलवाया जाएगा, जिसमें आपको मनरेगा का पारिश्रमिक मिलेगा।
July 13, 2020, 5:42 p.m. | Tags: MNREGA govt entitlements int-PAJ skd government scheme
बिहार के एक श्रोता साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि बिहार में बहुत सारे लोगों का राशन कार्ड नहीं होने के कारण सरकार द्वारा दिया जा रहा मुफ़्त राशन उन्हें नहीं मिल रहा है, सरकार को इस पर ध्यान देते हुए कारवाई करनी चाहिए, जिससे सभी जरूरतमंदों को मुफ़्त राशन मिल सके।
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बिहार से मुन्ना साझा मंच मोबाईल वाणी से जानना चाहते हैं कि क्या सोशल मीडिया में पीयूष गोयल जी के हवाले से वायरल हो रही खबर की रेलवे में अब दृष्टिबाधित व्यक्तियों को रोज़गार नहीं दिया जाएगा, सच है?
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आपको बताना चाहते हैं कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों को रेलवे में नौकरी न देने की सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबर पूरी तरह भ्रामक और निराधार है, इसलिए ऐसी खबरों से सावधान रहें। न तो केंद्र और न ही रेलवे मंत्रालय द्वारा ऐसी कोई अधिसूचना जारी की गई है, लिहाज़ा आपको चिंतित होने की कोई ज़रूरत नहीं है। चाहे वह रेलवे हो या फिर सरकार का कोई और विभाग, हर जगह दिव्यांगों को उनकी क्षमता के अनुसार अलग-अलग वर्गों में बाँटकर उनके लिए पद आरक्षित कर उसपर नियुक्तियाँ की जाती हैं।
July 2, 2020, 5:39 p.m. | Tags: int-PAJ
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पूर्णिया, बिहार से क्वारंटीन सेंटर में क्वारंटीन किए गए एक प्रवासी कामगार साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि इनके सेंटर पर बिहार सरकार बिस्तर, साबुन, खाना समेत कोई सुविधा नहीं दे रही है। सबकुछ अपने घर से मँगाकर करना पड़ता है, भोजन भी रोज़ पत्नी लेकर आती है, जिससे उसके भी संक्रमित होने का ख़तरा लगातार बना हुआ है। ये सरकार से इस सम्बंध में कुछ करने का निवेदन कर रहे हैं।
साझा मंच मोबाईल वाणी के कार्यक्रम आपका मंच, आपकी आवाज़ के माध्यम से बिहार से एक श्रोता बता रहे हैं कि सरकार के दावों के बावजूद लॉक डाउन में घर आए श्रमिकों के पास मनरेगा या अन्य कोई काम नहीं है।
Its Rajesh Kumar Mishra, a resident of Bihar! I have been listening from the various sources about the problems faced by the labourers during the lockdown. Nobody was ready to help them during this crisis. Even people were refusing to provide grocery items on credit to them. Now they are becoming concerned about the labourers who have returned back to their home states through different means of transportation. The industrialists, factory-owners and governments are saying that we would bring them back to work but it is not because they are sympathetic to them but they are worried about the production in those factories which are closed. Those migrant labourers, who have not managed to return back to their home states because of registration problems in the Shramik Special Trains or due to lack of any other transport facilities are still waiting for the government's response on their travel applications. I applied one month back to return to my home in Bihar but there has not been any response from the government yet. Clearly it is a strategy to hold back the remaining migrant labourers so that they can be involved in factory work immediately when the factories are ready for production. They know that its hard to bring those labourers back in near future who have returned to their home states.

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आपको बताना चाहते हैं कि अभी बिहार में मनरेगा के तहत काम करने पर प्रति दिन एक सौ चौरानबे रुपए पारिश्रमिक मिलेगा। मनरेगा-जॉब कार्ड के लिए आपको ग्राम प्रधान के पास आवेदन देना होगा, जिसके बाद आपके आवेदन को ग्राम प्रधान आवश्यक कार्यवाही के लिए पंचायत सचिव के पास भेजेगा। अगर किन्हीं कारणों से ग्राम प्रधान आपका जॉब कार्ड बनवाने में टालमटोल करते हैं, तब आप सीधे पंचायत सचिव को अपना आवेदन दे सकते हैं। अगर पंचायत सचिव भी किन्हीं कारणों से आपका जॉब कार्ड बनवाने में टालमटोल करते हैं, तब आप अपना आवेदन सीधे ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफ़िसर के पास दीजिए। ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफ़िसर आपके आवेदन को अग्रसारित कर पंचायत सचिव को भेज देंगे। तब पंचायत सचिव के लिए आपका जॉब कार्ड बनवाना मजबूरी हो जाएगी। आपके आवेदन से समबंधित आवश्यक कार्यवाही कर पंचायत सचिव उसे वापस ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफ़िसर के पास भेजेंगे, जहाँ आपके आवेदन की ऑनलाइन फ़ीडिंग कर आपको एक यूनिक जॉब कार्ड नम्बर जारी किया जाएगा, जिसकी मदद से आप भारत में कहीं भी मनरेगा के तहत काम पाने के हक़दार हो जाएँगे। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया के लिए आपको अपने आवेदन के साथ आधार और राशन कार्ड, तथा अपने मतदाता पहचान पत्र की छायाप्रति लगानी होगी। अगर बैंक खाता है तो बेहतर, नहीं तो खुलवाया जाएगा, जिसमें आपको मनरेगा का पारिश्रमिक मिलेगा.
July 13, 2020, 5:38 p.m. | Tags: MNREGA govt entitlements int-PAJ skd government scheme