उत्तरप्रदेश राज्य से हमारे श्रोता,साझा मंच के माध्यम से कह रहें हैं कि हरियाणा श्रम मसौदा 2021 के अनुसार अगर श्रमिकों से मशीन खराब होती है तो मज़दूरों के वेतन से पचास प्रतिशत काटी जायेगी। यह गलत है क्योंकि कभी मशीन ख़राब ही आती है और मज़दूरों का वेतन दस से पंद्रह हज़ार ही होता है ,ऐसे में मज़दूरों को काफी समस्या होगी। सरकार को सोच समझ कर मसौदा को पारित करनी चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य से हमारे श्रोता ,साझा मंच के माध्यम से कह रहें हैं कि मसौदा में मज़दूरों के लिए रविवार की छुट्टी तो निर्धारित की गई है लेकिन फिर भी कई फैक्ट्रियों में रविवार को भी मज़दूरों को बुला कर काम करवाया जाता है। ऐसे में सरकार क्या कर रही है
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा से नौमान अब्बासी साझा मंच के माध्यम से जानकारी दे रहें हैं की, इटावा के एक और इलाक़ा में इ श्रम कार्ड बनना शुरू हो गया है. बलराम सिंह चौराहा में बन रहा है इ श्रम कार्ड
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा से नौमान अब्बासी साझा मंच के माध्यम से जानकारी दे रहें हैं, इटावा के जसवंतनगर चैत्र में भी इ श्रम कार्ड बनना शुरु हो चूका है और अब तक एक सॉ बिस कार्ड बने हैं.
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा से नौमान ,साझा मंच के माध्यम से जानकारी दे रहें हैं कि इटावा के मेवाती टोला इलाक़े में अब भी निशुल्क ई श्रम कार्ड बनना जारी है। वेबसाइट सही से नहीं चल रहा है वहीं ओटीपी की समस्या भी हो रही है।
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा से नौमान ,साझा मंच के माध्यम से कह रहें कि ई श्रम कार्ड को बनवाने में अँगूठे के निशान और ओटीपी की समस्या आ रही है
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा से नौमान ,साझा मंच के माध्यम से जानकारी दे रहें हैं कि मेवाती टोला में लगातार असंगठित मज़दूरों का निशुल्क में ई श्रम कार्ड बनाया जा रहा है। हालाँकि अब भी थोड़ी समस्या आ रही है ,जैसे की फोटो अपलोड नहीं हो रहा है ,ओटीपी आदि की समस्या
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा से नौमान, साझा मंच के माध्यम से जानकारी दे रहें हैं, मेवाती टोला इलाक़े में रविवार को जन सेवा केंद्र पर वेबसाइट नहीं खुलने के कारण ई श्रम कार्ड नहीं बन पा रहा है।
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा ज़िला से राहुल कुमार यादव ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से सभी लोगों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ दे रहे है
उत्तरप्रदेश राज्य के इटावा ज़िला से राहुल कुमार यादव ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि सरकार जनता के लिए पटाखों पर बैन लगाती है परन्तु जब चुनावी जीत की बारी आती है तो खुद सरकार के लोगों द्वारा पटाखें फोड़े जाते है
