दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी का माध्यम से मोहम्मद शाहनवाज की बातचीत शौकीन से हुई शौकीन बताते हैं मेरे तीन बच्चे हैं मैं 2 साल से बराबर राशन कार्ड दफ्तर के चक्कर लगा रहा हूं अगर मेरे बच्चों का नाम नहीं चढ़ाया जा रहा है मैं एक मजदूर आदमी हूं 2014 से पहले महीने के 30 दिन काम होता था अब महीने के 10 से 15 दिन ही काम होता है बाकी दिन खाली रहना पड़ता है