दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से रीना परवीन की बातचीत से मुस्कान से हुई मुस्कान बताती हैं मैं अपने घर में कड़ाई का काम करती थी 3 महीने से काम नहीं मिल रहा है पहले जिस मे धागे छाटने का काम मिल जाता था घर पर अब नहीं मिला है मैंने कई बार आसपास के कारखाने वालों से कहो कहते हैं कि हमारी फैक्ट्री बंद है काम बहुत मंदा है काम नहीं हो रहा है बताइए कि इस मेगइ में घर चलाना मुश्किल हो रहा है हमारे पास मजदूरी कार्ड राशन कार्ड भी नहीं है और और हम किराए के घर में रहते हैं मेरे पिताजी एक मजदूर हैं मजदूरी का काम करते हैं उनको भी काम नहीं मिलता है
