दिल्ली राज्य से राम करण ने श्रमिक वाणी के माध्यम से एक सब्जी विक्रेता से बातचीत किया, बातचीत के दौरान सब्जी विक्रेता ने बताया की, इस रोजगार में कोई कमाई नहीं है। इनका कहना है की ये सही से बचत भी नहीं कर पा रहे है, जहा से ये सब्जी खरीद कर ला रहे है वहाँ से इन्हे महँगी सब्जी मिल रही है और जहा ये अपनी सब्जी की दुकान लगाते है वह भी इनको 100 रूपए से 200 रूपए तक दुकान लगाने के लिए पैसे देने पड़ते है। इस वजह से परेशन हो कर इन्होने ने सोचा है की ये अपने गाँव वापस चले जाए।