दिल्ली से नंदकिशोर ने साझा मंच के माध्यम से एक मजदुर से बात की। उन्होंने बताया कि काम मिलने में दिक्क्त होती है। खर्चे तो उतने ही है। इसमें कोई बदलाव नहीं है। हर महीने का खर्च 5 हज़ार होता ही है