जिला मुंगेर से विपिन कुमार मुंगेर मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की नोटबंदी को बीते हुए अभी कुछ ही महीने भी नहीं हुए की बाजार में नकली नोटों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है.हाल ही में एक घटना के अनुसार एक व्यक्ति ने जब एटीएम से पैसे निकाले तो उनमे दो हजार के कई नोट शामिल थे जो बच्चो के खेलने वाले नोट थे। सवाल ये है की ऐसे नोट एटीएम तक कैसे पंहुचा। क्या एटीएम की सेवा में लापरवाही बरती जा रही है ? कुछ असामाजिक तत्व ऐसे कारनामो को अंजाम दे रहे है उस पर केंद्र सरकार को लगाम लगाने की जरुरत है।

जिला मुंगेर से बिपिन कुमार जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि जब से बाजार में नए नोट आये हैं,तब से नकली नोटों की पकडे जाने की खबर भी सुनने में आ रही है,इसका मुख्य कारण यह है की आम आदमी को अब तक नए नोटों के पहचान करने का तरीका पता नहीं है इसी का लाभ नकली नोट बनाने वाले माफिया इसका फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में सरकार को कैशलेस लें दें को बढ़ावा देने के साथ नए नोटों के प्रमाणित चिन्हों का भी प्रचार करना चाहिए । जिससे इस तरह की धोखा धड़ी रुक सकेगी।

जिला मुंगेर से विपिन कुमार जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि भारत के जनता को कैशलेस में समस्या हो रही है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 500 व 1000 के नोट बंद किये।मोदी जी का यह व्यवस्था विदेशो का नक़ल है। वहां के अधिकांश जनता पढ़े-लिखे है परंतु यहाँ के जनता बिलकुल अनपढ़ है। डिजिटल इंडिया के नाम पर सारा लेन-देन भुगतान मशीनों द्वारा किया जा रहा है , जिससे जनताओं को परेशानी हो रही है।

विपिन कुमार जी मुंगेर से बताते है कि कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए सरकार लोगों को जागरूक करने में जुटी है लेकिन इलेक्ट्रॉनिक लेन देन की सुरक्षा के बारे में लोगों को जागरूक करना सरकार का प्रथम कदम होना चाहिए ,साथ ही सरकार को एक विभाग का गठन भी करना चाहिए। जहाँ आम लोग के साथ किसी तरह की धोखा धड़ी की संगत में अपनी शिकायत दर्ज करा सके। क्योंकि हमारे फेसबुक और दूसरे शोसल मिडिया के माध्यमों पर अपराध करने वालों को पकड़ने में ही असमर्थ है ,तो वह इलेक्ट्रॉनिक लेन देन में हुई गड़बड़ी करने वालों को क्या पकड़ पाएंगी

मधुबनी जिले के खुटौना प्रखंड से चंदू जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि नोटबंदी से परेशान जनता को प्रधानमंत्री जी की डिजिटल लेनदेन करने का सुझाव दे रहे है यह बहुत ही अच्छा सुझाव है।लेकिन भारत के लिहाजा यह उपयुक्त नहीं है।यह देखा जाता है की भारत में मुख्यतः तीन तरह के बाधा नजर आ रहे है।1. नागरिको को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।2.हमारे देश में साइबर सुरक्षा ढांचा बहुत ही कमजोर है।3. पुरे देश में सभी के पास इंटरनेट की पहुच नहीं है। आज भी भारत शिक्षा के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है।जब देश की सामान अबादी पढ़ लिख नहीं सकती फिर उनसे देश और दुनिया की जानकारी होने की अपेक्षा करना बईमानी है। जागरूकता के अभाव में हम यह कैसे उम्मीद कर सकते है की देश की जनता एक झटके में डिजिटल लेनदेन करने लगेगी।यह देखा जा रहा है की देश में इंटरनेट की स्थिति भी ठीक नहीं है।वे साइबर तंत्र भी सुरक्षित नहीं है जिससे लोग बेफिक्र होकर अपने कार्य मोबाइल पर इस्तेमाल कर सके।जब तक सरकार इन बढाओ को दूर नहीं करेगी तबतक डिजिटल लेनदेन का सपना साकार नहीं होगा।

जिला मुंगेर से बिपिन कुमार जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि प्रधान मंत्री के 500 और 1000 रुपये के नोट बंदी के फैसले के बाद से ही देश इसमें उलझ गया है।पुरे देश की जनता लाइन पर खड़ी है। शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा,जो पैसे के लिए लाइन में खड़ा नही हुआ हो। वे कहते हैं कि नोट बंदी के घोषणा के बाद से देश में आलम यह है कि संसद के शीतकालीन सत्र में भी आम लोगों की हित में बाते नही की गई और सिर्फ नोट बंदी को लेकर हंगामा ही किये गएँ।

Transcript Unavailable.

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जिला मुंगेर,से बिपिन कुमार जी मुंगेर की आवाज मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे है की मुंगेर प्रखण्ड क्षेत्र में नोटबन्दी का असर आंगनवाड़ी में पढ़ने वालों बच्चो के पोषाहार में भी पड़ने लगा है ।नवम्बर महीने की पोषाहार राशि उपलब्ध नहीं हो पायी है। केंद्र संचालन के पोषाहार के लिए सेविकाओं को हर महीने पन्द्रह सात सौ रुपये दी जाती थी।नोटबन्दी के बाद नवम्बर महीने की पोशाहार राशि नहीं मिली थी। पन्द्रह नवम्बर को मुंगेर प्रखण्ड क्षेत्र के राशन का वितरण नहीं हो पाया है।