लॉकडाउन कि अस्थिती में खगड़िया के मानसी के मक्का उद्योग थप **************************खगड़िया जिला को भारत के मानचित्र पर मक्का उत्पादन में खगड़िया का स्थान है। यहां 50 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती की जाती है। यहां के लोग इसे 'पीला सोना' कहते हैं। लेकिन मक्का आधारित उद्योग नहीं रहने से जिले में आज भी विकास की गाड़ी रेंग रही है। विकास की गाड़ी सरपट दौड़े इसको लेकर मानसी के पास प्रिस्टीन मेगा फूडपार्क की स्थापना हुई। लेकिन यह कब पूर्ण रूप से कार्य करेगा यह सवाल अब भी भविष्य के गर्भ में है। लॉकडाउन को लेकर मक्का कारोबारी भी अन्य वर्षों की अपेक्षा यहां रूख नहीं किए हैं, जिससे किसानों को सही दाम भी नहीं मिल रहा है। उनके लिए त्रासद स्थिति है।मक्का किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बीते दिनों आंधी व बारिश ने मक्का फसल को व्यापक नुकसान पहुंचाया। जिससे किसानों को कम उपज की मार झेलनी पड़ी। बावजूद किसान अपनी मेहनत के बल पर जब फसल तैयार कर घर लाया, तो मक्का के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। लॉकडाउन के कारण बाहर के व्यापारी जिले में आकर मक्का की खरीद नहीं कर रहे हैं और न ही स्थानीय व्यापारी अन्य जगहों पर भेज पा रहे हैं। मानसी रेलवे रैक प्वाइंट चालू हुआ है, लेकिन यहां भी कई तरह के गतिरोध हैं। इधर मांग कम होने के कारण मक्का की कीमत काफी कम है। अप्रैल माह में मक्का की कीमत 20-21 सौ रुपये प्रति क्विटल थी। वर्तमान में कीमत आधी हो गई है। उद्योग-धंधे बंद होने के कारण नहीं है मक्का की मांग कोरोना संक्रमण का प्रभाव और लॉकडाउन के कारण अधिकांश उद्योग-धंधे बंद हैं। जिस कारण मक्का की मांग में कमी आई है। जिससे व्यापार पर असर पड़ा है। पहले मांग के कारण बाहर के व्यापारी खेत पर पहुंचकर मक्का की फसल तैयार होते ही खरीद करते थे। परंतु, वर्तमान में बाहर के व्यापारी नहीं आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारी भी कई कंपनियों के बंद होने व मांग कम होने के कारण मक्का खरीद कर बाहर नहीं भेज रहे हैं। व्यापारी बबलू मंडल, मनोज कुमार के अनुसार वर्तमान में मक्का की मांग बाहर प्रदेशों में कम है। सही दाम भी नहीं मिल पा रहा है। ट्रक वाले किराए अधिक मांगते हैं। जिससे व्यापार पर असर पड़ा है। क्या कहते हैं किसान किसानों के अनुसार बाहर के व्यापारी यहां नहीं आ रहे हैं। स्थानीय व्यापारी भी मक्का खरीद में रुचि नहीं ले रहे हैं। समय का फायदा देख जिन व्यापारियों के पास स्टॉक कर मक्का रखने की व्यवस्था है वे औने-पौने दाम बताते हैं। हाल यह है कि विवशता के मारे किसान 11-12 सौ रुपये क्विटल मक्का बेच रहे हैं। किसान सुनील कुमार, विकास सिंह ने कहा कि लागत खर्च भी निकलना मुश्किल है। कोट मक्का आधारित लघु उद्योग स्थापित करने को लेकर इच्छुक कारोबारी को प्रावधान के तहत सहायता प्रदान की जा सकती है। आनंद प्रसाद सिन्हा, महाप्रबंधक, उद्योग विभाग, खगड़िया