निलंबित शिक्षकों को मुख्यालय में आकर योगदान करने के आदेश के साथ ही शिक्षक के पांव फूलने लगे हैं। यह आदेश गिरीवर दयाल सिंह ने जारी किया है तथा कहा है कि निलंबित शिक्षक अंकित मुख्यालय में आकर योगदान दें। यदि शिक्षक मुख्यालय से बाहर है। तो वह जिलाधिकारी से पास बनवाकर मुख्यालय पहुंचे। जिसके बाद शिक्षक के पांव फूलने लगे हैं। विदित हो कि शिक्षक संघ द्वारा हड़ताल की घोषणा के बाद लाखों लाख शिक्षक अपने गृह जिला चले गए थे। और इस बीच हड़ताल में ही सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दिया। जिसके वजह से शिक्षक घर में फंसे रहे। अब प्रश्न उठता है कि शिक्षक आंदोलन कर रहे थे या घर पर थे ? राज्य सरकार के अपर सचिव गिरिवर दयाल सिंह के आदेश के साथ ही शिक्षकों व संघों दोनों की पोल खुल रही है कि शिक्षक हड़ताल पर थे या घर पर इससे कई प्रश्न घर कर गया है। वैसे सरकार ने भी अच्छा डंडा चलाया है कि 24 फरवरी तक माध्यमिक व प्लस टू शिक्षक ड्यूटी पर थे। तो 24 फरवरी तक वेतन भुगतान किया जाएगा। और हड़ताल अवधि वालों का उनका वेतन बाद में दिया जाएगा। इस आदेश से शिक्षक व संघ दोनों को सरकार ने तारा दिखा दिया है। जबकि सरकार के इस फैसले का संघ विरोध कर रही हैं। ज्ञात हो कि लॉकडाउन के बीच शिक्षकों को क्वॉरेंटाइन ड्यूटी देना या लगाना है। जिसके कारण शिक्षकों को मुख्यालय आकर योगदान देने को कहा जा रहा है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
