बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं की एक बड़ी आबादी घर परिवार के काम में ही खपत हो जाती हैं। घरेलू महिलाएं घर परिवार से जुड़े अनेक ऐसे काम करती हैं जिनकी गिनती रोजगार एवं अधिकारी के कामकाज के रूप में नहीं किया जाता है। उनकी मेहनत आज भी पहचान और आय की मोहताज में बनी हुई है और उनके द्वारा किए जा रहे हैं काम को पहचानता कभी नहीं मिल पाती है। ज्यादातर घरेलू महिलाएं काम तो खूब कर रही हैं लेकिन विधिवत रोजगार से वंचित है,अधिकारिक कमाई से दूर है। इससे देश को भी नुकसान हो रहा है,इसलिए यह जानना भी जरूरी है कि ऐसा क्यों हो रहा है घरेलू महिलाओं के घर में रहने एवं घरेलू काम को प्राथमिकता दी जाती है यह पुरानी आदत है लेकिन यह परंपरा महिलाओं की स्थिति को कमजोर भी बनाती हैं। महिलाओं के काम बढ़ते हैं कमाई नहीं,घरेलू महिलाएं घरेलू कार्य में पुरुषों की भागीदारी करनी चाहिए ताकि जरूरतमंद योग्य और मेहनती महिलाओं को रोजगार के ज्यादा मौके मिले। वही वेतन काम के अनुसार ही मिले लेकिन लैंगिक आधार पर नहीं।
