मध्य प्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले से योगेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि, यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी जंग में फंसे जिले के विद्यार्थी का घर वापसी की राह आसान हुए हैं। घंटो सफर और बॉर्डर पर इंतजार करने के बाद विद्यार्थी अब सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए हैं। इनमें कोलाढाना निवासी डॉ प्रशांत चौरसिया के बेटे प्रद्युम्न ,परासिया रोड के सामने अपनी कॉलोनी निवासी धनंजय त्रिपाने के बेटे संकल्प, केशवराव भादे के बेटे अभिषेक सुरक्षित स्थान हंगरी पहुंच गए हैं, वहीं पांढुर्णा के एसबीआई बैंक के पदस्थ सुभाष बोकाडे के बेटे दीपांशु बोकाड़े रोमानिया पहुंच गए हैं ।वहीं पिपलानारायणवार के डॉक्टर प्रभात सरकार की बेटी इशिका यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में स्टेट के पास है। इनके साथ 500 से ज्यादा लोग हैं, जिसमें 300 इंडियन है फिलहाल उनके बॉर्डर तक पहुंचने को लेकर आसान नहीं है। डॉक्टर प्रभास सरकार से बताया कि लगातार संपर्क में है जिस जगह पर बेटी वहां से रूसी बॉर्डर एक विकल्प है, लेकिन अभी इसमें कुछ नहीं हुआ है। क्लिक कर ऑडियो सुन सकते हैं।
कल तक लौट आयेगी गौरी दुरभाष पर की पापा से चर्चा सौसर - छिंदवाड़ा जिले के विकास खंड बिछुआ के ग्राम बडोसा की निवासी गल्ला व्यापारी चिंतामण शिंगनदिपे की बेटी गोरी यूक्रेन के टनोपिल नेशनल मेडिकल में थर्ड इयर छात्रा है ।पांच दिन पूर्व वह रेमनिया बार्डर के लिए निकली कल तक वह देश वापसी होगी इस सम्बन्ध में गौरी के पापा चिंतामण शिंगनदिपे से विशेष बातचीत छिंदवाड़ा मोबाइल वाणी पर
मध्य प्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले से योगेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि रूस और यूक्रेन के हमले के बीच तीसरे दिन खार्किव में बढ़ती दहशत से जिले के वह परिवार भी दहल उठे हैं। जिनके बच्चे खार्किव में एक बंकर में फंसे हुए हैं तो 24 घंटे बाद इंटरनेट सेवाएं के बाद बहाल होने के बाद प्रत्युन और संकल्प ने अपने परिजनों से बात की बच्चों ने बताया कि उनके पास अब सिर्फ 10 दिन का राशन बाकी है। मैस से भी उन्हें अब चंद कौर चावल और एक चम्मच दाल मिलती है। पानी की मशीनें बंद है ।पीड़ित परिजनों ने सरकार से गुहार लगाई है, कि उनके बच्चों को जल्द से जल्द वापस लाने के लिए कोई रास्ता तैयार करें। क्लिक कर ऑडियो सुन सकते हैं।
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केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं. हाल ही में भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि सिंगापुर में करीब 4800 भारतीय ऐसे हैं जो कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें 90 फीसदी तो केवल श्रमिक के तौर पर काम कर रहे थे. यानि इन लोगों की आर्थिक स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि मिस्र में बीते चार साल से मीडिया घरानों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, असंतुष्ट आवाजों को इस हद तक दबाया जा रहा है कि वहां पत्रकार होना एक अपराध बन गया है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
कोरोना संक्रमण से जूझ रही दुनिया के कोने—कोने से भारतीयों ने लौटने की तैयारी शुरू कर दी है. संयुक्त अरब अमीरात में एक लाख 50 हजार से ज्यादा भारतीयों ने लॉकडाउन के बीच घर लौटने के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया के तहत भारतीय मिशनों में आवेदन दिया है। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें।
जहां एक ओर पूरी दुनिया लॉकडाउन के घेरे में है ताकि जितने लोग जीवित हैं वे सुरक्षित रहें. वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश में श्रमिकों का जीवन दांव पर लगार कर कई गारमेंट फैक्ट्रियों को खोल दिया गया है. जानकारी के अनुसार देश की कुल 7602 गार्मेंट फैक्ट्रियों में से 2916 को दोबारा शुरू कर दिया गया है. विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
पैसे और नाम कमाने की चाहत में विदेश पहुंचे भारतीय अब वापिस आना चाहते हैं. कोरोना काल में हर किसी को यह समझ आ रहा है कि चाहे जो भी हो जाए मुश्किल दौर से निकलने का जज्बा केवल भारत के पास है. शायद यही कारण है कि अमेरिका में बसे भारतीय अब वापिस भारत आना चाहते हैं.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बाद से अफ्रीका महादेश के अस्पतालों को इन दिनों इंटेंसिव केयर बेड और वेंटिलेटर्स की भारी किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है. ये कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन का. WHO ने बयान जारी करते हुए कहा कि अफ्रीका के 43 देशों के अस्पतालों में 5,000 से भी कम इंटेंसिव केयर बेड हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
