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कोविड की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही एक बार फिर से जो सवाल मुंह उठा रहा है वह है गरीब की थाली के भोजन का. सरकार ने एलान किया है कि गरीबों को दिवाली तक नि:शुल्क राशन दिया जाएगा पर सवाल ये है कि पुरानी व्यवस्था में भी बहुत से गरीब परिवार भूख से बिलखते रह गए और सरकारी मुलाजिम उन्हें दाना देने नहीं आया. साथियों, अगर आप भी नि:शुल्क राशन पाने वालों की श्रेणी में आते हैं तो हमें बताएं कि क्या जब से कोविड ने देश में पांव पसारे हैं तब से आपको नियमित रूप से सरकारी राशन मिल रहा है? अगर नहीं तो डीलर राशन देने से मना क्यों कर रहे हैं? जो लोग नया राशन कार्ड बनवाना चाहते हैं क्या उन्हें राशन कार्ड बनवाने में दिक्कतें आ रही हैं? अगर दिक्कतें हैं तो वे क्या हैं और क्या इस बारे में प्रखंड आपूर्ति अधिकारी या जिला अधिकारी की लिखित रूप से शिकायत की है? सरकार राशन ना मिल पाने की स्थिति में आप कैसे अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं? क्या कोविड के दौरान आपके परिवार को या आपको राशन ना होने पर भूखे पेट सोना पडा है? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.
साथियों, कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते दिख रहा है. अभी कुछ दिन पहले अस्पतालों के बाहर जिस तरह लाइन लगी हुई थी, वो अब कम होती जा रही है. इस बीच सरकार ने देश के कोने—कोने में कोरोना बचाव टीकाकरण अभियान की शुरूआत कर रखी है. लेकिन इस अभियान में बहुत सी बुनियादी दिक्कतें आ रही हैं. सबसे ज्यादा मुश्किल ग्रामीण क्षेत्र के उन लोगों को हैं जो स्मार्ट फोन का इस्तेमाल नहीं करते या फिर जो कर रहे हैं उन्हें टीकाकरण के स्लॉट नहीं मिल पा रहे. आइए ग्रामीणों से ही सुनते और जानते हैं कि वे टीकाकरण अभियान का हिस्सा क्यों नहीं बन पा रहे हैं?
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क्या जन धन खाते से पूरी राशि की निकासी की जा सकती है ? मोबाइल वाणी के संवाददाता बता रहे है पूरी जानकारी ..सुनने के लिए क्लिक करें ऑडियो पर...
दोस्तों, दिल्ली समेत देश के कई दूसरे राज्यों में लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा दिया गया है. केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन को आखिरी विकल्प के तौर पर रखा है पर राज्यों में कुछ छूट के साथ लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू लगाया जा रहा है. जाहिर सी बात है कि इससे जनता की भलाई होगी पर समाज का एक वर्ग वो भी है जो रोजाना काम करता है और दैनिक मजदूरी से पेट भरता है. लॉकडाउन के कारण उनका जीवन ज्यादा प्रभावित हो रहा है. जब हम ये मसला लेकर लोगों के बीच गए तो लॉकडाउन को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया मिली, आइए सुनते हैं..
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नमस्कार साथियों, देश में एक ओर चुनावी तैयारियां चल रही हैं तो वहीं दूसरी ओर हजारों मतदाता अपने—अपने हक के लिए धरना दिए बैठे हैं. किसान इस बात से परेशान हैं कि सरकार उन्हें कॉरपोरेट के हाथों की कठपुतली बनाने की तैयारी कर रही है और गरीब इस बात से दुखी हैं कि उनकी थाली में राशन नहीं पहुंच रहा. इन सबके बीच मध्यम वर्ग में जीने वाला आदमी अब बढ़ती हुई महंगाई से त्रस्त हो गया है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
