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झारखण्ड राज्य के चंदरपुरा प्रखंड से नरेश महतो जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से झारखण्ड सरकार द्वारा राज्य में "पंचायती राज स्वशासन परिषद" का गठन करने के निर्णय पर कहते हैं कि राज्य में "पंचायती राज स्वशासन परिषद" का गठन होने से पंचायतों का विकास तो नही हो पायेगा परन्तु ,भ्रष्टाचारिओं का विकास जरूर होगा।हाल ही में चंद्रपुरा प्रखंड के बंदियों पंचायत में सामाजिक अंकेक्षण किया गया,जो ग्रामीण विकास विभाग झारखण्ड सरकार की तरफ से किया गया था। सामाजिक अंकेक्षण की टीम ने सम्पूर्ण पंचायत में चल रहे, सभी योजनाओं का जाँच -पड़ताल किया। इस प्रक्रिया से जनता को विश्वास हुआ कि अब वो भ्रष्टाचारियों को सजा दिला सकते हैं,लेकिन दुर्भाग्यवश भ्रष्ट अधिकारिओं के द्वारा ही जन-सुनवाई की गई। "पंचायती राज प्रशासन परिषद" का गठन होने से भी वस्तु-स्थिति में कोई खास बदलाव नही आने वाला है ,क्यूंकि इसकी डोर भ्रष्टाचारियों के हाथ में ही होगी तथा भ्रष्टाचारियों की एक कुर्सी और बढ़ जाएगी।पंचायत की जनता इस उम्मीद के साथ उपस्थित हुए कि, भ्रष्टाचारियों पर क्या कार्यवाही होने वाली है,परन्तु सभा में वो कहावत सिद्ध हुआ "बाप भ्रष्टाचारी ,तो बेटा दुगना भ्रष्टाचारी।
सोनिया कुमारी,जिला बोकारो से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि मलेरिया से सम्बंधित दवा छिड़काव के बारे में जो बताया जा रहा है उसका छिड़काव तो किया है और इससे मच्छर भी भाग जाते है।लेकिन बाहर में तो मच्छर रहता ही है और वो मच्छर फिर अंदर आ सकता है।इसलिए कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे बाहर भी मच्छर न रहे क्योकि सभी लोग बाहर भी आना-जाना करते है जिससे मच्छर के काटने का खतरा रहता है।इसलिए घर के बाहर में दवा का छिड़काव करने के लिए कुछ ऐसा दवा सरकार से मंगवाना चाहिए जिससे घर के बाहर भी मच्छर से छुटकारा मिल सके।
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झारखण्ड जिला बोकारो,प्रखण्ड चंद्रपुरा से कैलाश गिरी जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि झारखंड में अभी तक पलायन पर काबू नहीं पायी है।आज भी लोगो का पलायन जारी है और दिन-प्रतिदिन इसमें वृद्धि होने की सूचना ग्रामीण इलाको से प्राप्त हो रही है।ठोस रोजगार के आभाव में लोग पलायन करते है।वहीं कई कल-कारखाने बंद होने के कगार में है और कई बंद हो चुके है।यह भी पलायन का एक मुख्य वजह है।प्रधानमंत्री जी के घोषणा के अनुसार प्रत्येक साल 2 करोड़ लोगो को रोजगार मिलना है । लेकिन कौशल योजना के तहत छोटे व्यवसाय करके लोगो को जीविका उपार्जन करना हर कोई व्यक्ति के वश की बात नहीं है।अगर सारे लोग व्यापार करेंगे तो खरीदने वालो की संख्या कम हो जाएगी।जबतक रोजगार का सृजन नहीं होगा तबतक लोन से कुछ लोगो की जीविका उपार्जन होती लेकिन यह आज तक पूर्ण होते नहीं दिखाई दे रही है।
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