ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का सत्र फिर पिछड़ने के कगार पर हो गया है। कोरोना संक्रमण और इसके चलते दो बार लगे लॉकडाउन व अन्य प्रतिबंधों से परीक्षाएं नहीं हो पा रही हैं। सत्र 2021 की स्नातक प्रथम खंड, तृतीय खंड तथा स्नातकोत्तर प्रथम एवं तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाओं की तैयारियां पूरी हो जाने के बावजूद परीक्षाएं नहीं हो रही थी। इन परीक्षाओं के लिए छात्रों से परीक्षा फॉर्म काफी पहले भरवा लिया गया। कोरोना संक्रमण एवं लॉकडाउन के कारण परीक्षा फॉर्म भरने के लिए दो-दो बार 15 दिन तक परीक्षा फॉर्म भरने के लिए तिथियां भी विस्तारित की गई थी। परीक्षा की सारी तैयारियां कर ली गई थीं लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने परीक्षा के आयोजन पर ब्रेक लगा दिया।इधर लोगों का विश्वास था कि छह जुलाई के बाद प्रतिबंधों से मिलने वाली छूट के बाद परीक्षा हो जायेगी लेकिन राज्य सरकार ने फिलहाल आठ अगस्त तक परीक्षाओं के आयोजन पर रोक लगा रखी है। इससे छात्रों में निराशा हो रही थी। छात्रों का कहना है कि कोरोना के लिए निर्धारित प्रॉटोकॉल का अनुपालन करते हुए वैसी परिस्थिति में परीक्षाएं हो सकती थी। पिछली बार भी ऐसी परिस्थिति में बिना कठिनाई की परीक्षा हो गई थी। इस पर कोरोना की तीसरी लहर की चर्चा से छात्रों की परेशानी और बढ़ गई है। प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों सहित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सत्र भी पूर्व में पीछे चल रहे थे लेकिन कुलाधिपति के आदेश के बाद काफी मशक्कत कर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सत्रों को तीन साल पहले पूर्ण रूप से नियमित कर लिया था। सत्र नियमित होने से छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई थी लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए छात्रों में मायूसी व्याप्त है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के आयोजन में बाढ़ और चुनाव भी बहुत बाधक साबित होता रहा है।फिलहाल चुनाव तो नहीं लेकिन बाढ़ ने दस्तक दे दी है। अगर बाढ़ का प्रकोप बढ़ा तो इससे भी व्यवधान हो सकता है। सत्र नियमित होने से इस क्षेत्र से छात्रों का पलायन कम होने लगा था। नामांकन में छात्रों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ने लगी थी लेकिन अगर स्थिति इसी प्रकार रही तो भविष्य में फिर छात्रों का पलायन शुरू हो सकता है। विश्वविद्यालय में सालभर में करीब साठ परीक्षाएं हुआ करती हैं। अन्य छोटी परीक्षाओं का आयोजन तो समय पर कर लिया जाता है लेकिन स्नातक तीन खंडों में छात्रों के अधिक होने की वजह से परीक्षा की तैयारियों और आयोजन में थोड़ा अधिक समय लगता है। इसके लिए अधिक परीक्षा केंद्र भी बनाने होते हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. एसएन राय ने बताया कि स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षाओं की तैयारियां पूरी हो चुकी थी और कम समय में परीक्षा कार्यक्रम जारी कर परीक्षा करायी जा सकती थी। लेकिन सरकारी आदेश होने के बाद इस पर फिर ग्रहण लग गया था।