सर् जखनि बच्चा के तबियत खराब होय जाए है त डॉक्टर हिया ले जाए लेल 8 km दूर घुमय परय हय। जबकि पुल बनी जेतै त उ दूरी 1 किलो मीटर हेतै।आब की कहू की पुल के आवश्यकता केहन हय। इस आवाज में आपको क्या लगता है कि कोई राजनीतिक पार्टी से संगठित होंगे।नही बिल्कुल नही ।यह उस मजबूर ग्रामीणों की आवाज है जो पुल के अभाव में दर्द झेल रही है।जिसे मात्र जरूरत है एक पुल की। आठ से दस पंचायत की गाँव के लोग नाव के सहारे है।जब इनके अपने नजदीकी बाजार बाघोपुर जाना होता है तो एक किलो मीटर की दूरी पार करने के लिए आठ किलों मीटर की दूरी तय करना होता है।वर्तमान विधायक अशोक कुमार (मुन्ना मंडल) 2010 के चुनाव से वादे करते आ रहे है मगर आजतक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।इसबार ग्रामीणों ने वोट वही करने की बात कही जो पुल के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर देगें।जनता में काफी नाराज़गी है,होना लाजमी है।मगर यह नराजगी चुनाव व चुनाव के बाद भी बनी रहें।किसी राजनीतिक पार्टी के वादे में न फॅसे।सरकार पुल पुलिया और सड़क पर वोट मांग रही है।लोग आज भी पुल मांग रही है।15 से 20 हजार की आवादी प्रभावित है।बातें बहुत है बातों का क्या!