कोविद-19 के दौरान कोरोना वायरस नामक महामारी से देश की जनता को बचाने के लिए समुचित सुविधाओं से सम्पन्न सामुदायिक अस्पतालों के निर्माण की आवश्यकता है, समुचित मात्रा में सुरक्षा उपाय, दवा, डाॅक्टर, मेडिकल स्टाफ, किट की आवश्यकता है और हमारी लोकतांत्रिक सरकार व उनके भक्तों को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की सुझ रही है। यही है संविधान सम्मत लोकतांत्रिक पद्धति से चुनी हुई सरकार की वास्तविकता। सम्पूर्ण मानवीय मूल्यों को ताक पर राम मंदिर निर्माण जोड़ों पर। देश की जनता एक तरफ कोरोना महामारी से तो कई राज्यों की जनता बाढ़ और वज्रपात से कराह रही है। बिहार सरकार के जनप्रतिनिधियों को चुनाव की जल्दबाजी है। जरा सोचिये और मौका तलाश कर अपनी आवाज बुलंद करिए। बाल संरक्षण भी एक चुनावी मुद्दा है और उसी सामाजिक राजनीतिक प्रयास की वजह से हम आज बाल संरक्षण शब्द का प्रयोग कर पा रहें हैं। इतना हीं नहीं आज कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर बच्चों के जीवन पर हीं तो पड़ा है। इस महामारी की वजह से भी बाल श्रम, बाल विवाह, बाल व्यापार, यौन शोषण और न जाने कितने तरह के अत्याचार बढ़ रहे हैं। किसी भी सरकारी या नीजी अस्पतालों में सामान्य या यों कहें कि कोरोना के इतर किसी बीमारी का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए समुचित सुविधा इन अस्पतालों में नहीं है। समुचित बेड का अभाव है। बिहार की आबादी के हिसाब से बिहार के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में कम से कम दो लाख छब्बीस हजार बेड होने चाहिए। लेकिन हमारे इन अस्पतालों में इन बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है और हम चले कभी थाली पीटने, कभी टॉर्च जलाने तो अभी अयोध्या में राम मंदिर बनाने। मैंने तो सिर्फ इतना हीं अर्ज किया है कि देश को कोरोना महामारी से बचानें हेतु और बच्चों को सुरक्षा देने के लिए सबसे पहले अस्पतालों को दुरुस्त करना जरूरी जान पड़ता है, फिर जब हमारे देश की बहुसंख्यक जनता जीवित रहेगी तो भगवान राम का मंदिर भी बन जाएगा। इस बुनियादी सबालों में राजनीति इसलिए दिखती है कि इस देश में संविधान और लोकतंत्र को मजाक समझने वाले कुछ लोग/समूह वर्षों पुरानी असमानता, गैरबराबरी और अन्याय पर आधारित समाज की यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।