झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जमीन महिलाओं के नाम पर होने के कई फायदे हैं। जैसे - सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा,आर्थिक और क़ानूनी सुरक्षा,टैक्स में लाभ,सामाजिक सशक्तिकरण,इत्यादि।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से रौशन यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कई राज्यों में महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर पुरुषों की तुलना में कम शुल्क 4% -6 % तक लगता है। उनको बैंक लोन लेने पर ब्याज दरों में 0 .50 % तक की छूट मिलती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से मयंक कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि अब शादीशुदा बेटियों को पिता की संपत्ति में हिस्सा मिलेगा। माता - पिता के देहांत के बाद मायके में महिलाओं को कोई अधिकार नहीं मिलता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कई महिलाएं खेती करती हैं लेकिन उनको जमीन में अधिकार नहीं दिया जाता है। 80 % जमीन पुरुषों के नाम होती है। इसका मुख्या कारण पितृसत्ता है। समाज में यह धारणा रही है कि वंश पुरुष के नाम से चलता है इसलिए संपत्ति बेटों को दिया जा रहा है। महिलाओं के ससुराल जाने के कारण उनको मायके में अधिकार नहीं दिया जाता है ताकि सम्पाती का विभाजन न हो सके। समाजिक दबाव के कारण पहले महिला अपने अधिकार के लिए दावा नहीं कर पाती थी लेकिन हिन्दू उत्तराधिकारी अधिनयम 2005 के संसोधन के बाद पुत्र के तरह पुत्रियों को भी अधिकार दिया गया है

दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि वसीयत नामों के माध्यम से इस प्रक्रिया में संपत्ति का स्वामी एक वसियत लिखकर यह बताता है कि उनकी संपत्ति उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को किस प्रकार से हस्तांतरित की जाएगी और बिना वसियत के उत्तराधिकार -इसमें जब कोई व्यक्ति बिना वसियत छोड़े मृत्यु को प्राप्त होता है तो उसके संपत्ति उत्तराधिकार कानूनों के अनुसार उसके विधिक उत्तराधिकारियों में बाँट दी जाती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से महिला भूमि अधिकार पर अपनी राय साझा किया।राजकुमार मेहता ने बताया कि श्वेता सिंह द्वारा लिखे गए लेख में संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मानने से सम्बंधित विस्तृत जानकारी दी गई है। साथ ही मौलिक अधिकार से संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त करने तक समपत्ति के अधिकार के विकास का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें संविधान सभा द्वारा इस अधिकार को भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में शामिल करने के कारणों और सरकार द्वारा इसे हटाकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300 A के अंतर्गत संवैधानिक अधिकार के रूप में पुनः वर्गीकृत करने के कारणों का भी उल्लेख किया गया है

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से सुरेंद्र रवि दास मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि अभियान के तहत गाँव और शहर के स्तर पर आयोजित मिट्टी एकत्रित करने और कलश यात्राओं में महिलाओं को भाग लेने का पूरा अधिकार है जो देश के प्रति सम्मान को दर्शाता है और और यह अभियान महिलाओं को देश के विकास में सीधे भागीदार बनाता है। यह एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है जिसमे महिलाओं की भागीदारी,आत्मनिर्भरता और नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक कदम है।