झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सावित्री बााई फूले एक भारतीय समाज सुधारक थी जिन्होंने भारत में महिलाओं और निम्न जातियों पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यो और जाति व्यवस्था के खिलाफ उनके संघर्ष के लिए जाना जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि विश्व के अधिकांश देशों में प्रमुख सत्ता संरचनाएं, कानून, रीति रिवाज और सांस्कृतिक मापदंड महिलाओं को भूमि पर समान अधिकार से वंचित करते हैं। स्थानीय राष्ट्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में में अपिहार भूमिका निभाने के बावजूद विश्व भर में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली पंद्रह प्रतिशत से भी कम महिलाओं को भूमि समबंधी सुरक्षित अधिकार प्राप्त हैं।लैंगिक असमानता हर किसी को प्रभावित करती हैं। जब महिलाओं को सुरक्षा और अपनी भूमि पर नियंत्रण मिलता है तो शिक्षा तक पहुंच बढ़ती है। यवा की आयु बढ़ती है, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार होता है,आय बढ़ती है ,गरीबी का चक्र टूटता है और घर और समुदाय के भीतर सत्ता में स्थाायी बदलाव आता है और जब परिवार और समुदाय स्तर पर इन परिणामों में सुधार होता है तो यह जलवायु परिवर्तन ,खाद सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ जैसे वैश्विक गहरे लैंगिक मुद्दे पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को भूमि से बेदखल कर दिया जाता है। कभी कभी तो उनकी जान को भी खतरा होता है। भूमि का अधिग्रहण मिलने के बावजूद महिलाओं को पुरुषों द्वारा किए जाने वाले उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। कई महिलाओं के पास भूमि है लेकिन उनको भूमि एक बोझ जैसी लगती हैं
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से गीता सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को जमीन में हक़ मिलना चाहिए। संपत्ति के अधिकार से महिलाओं को वंचित कर दिया जाता है। जिस दिन महिलाओं को संपत्ति में अधिकार होगा तो उनका एक पहचान होगा
गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र निर्माण और उपयोग की जानकारी दे रहे हैं ।
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि एसएलआईसी दलित समुदाय के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक प्रणाली का उपयोग करता है। दलित समर्थक सरकारी नीतियों और योजनाओ का निर्माण ऐतिहासिक कानूनी निर्णयों के कारण बढ़ते दबाव का परिणाम है। दलित आबादी को अक्सर शारीरिक श्रम और सफाई आदि जैसे - मानव मल, पशु शव आदि का निपटान करने के लिए मजबूर किया जाता है। दिल्ली उच्च न्यायालय के एक फैसले से महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया हैं। जिसमें न्यायालय ने सरकार को दिल्ली में शीवर कर्मचारियों की सुरक्षा स्थितियों में सुधार करने का निर्देश दिया है। हालाँकि इस मामले का दलित समुदाय पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। यह भी निर्देश दिया गया कि राज्य को आपातकालीन आधार पर सीवर सफाई के लिए व्यक्तियों को रोजगार के पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य पूरी तरह से रखना चाहिए।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि एसएलआईसी दलित और आदिवासी आबादी के लिए न्याय तक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से प्रभावित समुदाय के साथ मिलकर कानूनी सहायता केंद्र स्थापित करने का काम करती है। इस कार्य का एक माह तक पूर्ण हिस्सा प्रशिक्षण कार्यकर्मों और दलित आदिवासी अधिकारों और कानूनों पर स्थानीय भाषाओं में प्रकाशनों के माध्यम से इन हासिए पर पड़े समुदाय को मौलिक अधिकार के बारे में जागरूक करना है । एसएलआईसी का महत्वपूर्ण घटक दलित आदिवासी का नेटवर्क बनाना है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कानून और अम्ल के बीच अंतर् - मजबूत कानूनी प्रावधान जैसे एससी एसटी अधिनियम के बावजूद जमीनी स्तर पर उन्हें लागू करना मुश्किल है। सामाजिक संस्कृति बाधाएं - इसमें जाति आधारित पदानुक्रम और सामाजिक बहिष्कार उन्हें न्याय और संसाधनों से दूर रखता है। आर्थिक निर्भरता -इसमें भूमिहीनता और खेतिहार मजदूर होने के कारण वे और भी शोषित होती हैं। कानून की सहायता जैसे दलित और आदिवासी अधिकार पहल जैसे संगठन कानूनी सहायता और जागरूकता प्रदान करती हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि दलित महिलाओं की स्थिति बहुत ही गंभीर हो गई है। अधिकांश दलित परिवार भूमिहीन या छोटे किसान 91 प्रतिशत ऐसी परिवार भूमिहीन या सीमांत ज्योत वाले हैं और 61 प्रतिशत दलित महिलाओं खेतिहार मजदूर हैं। वे अक्सर यौन शोषण और खतरनाक परिस्थितियों में काम करने -जैसे पत्थर की खदाने के प्रति संवेदनशील होते हैं। जिससे उनकी गतिशीलता सीमित होती है। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में मौखिक, शारीरिक और यौन हिंसा का समान सामना करते हैं जो जाति और लिंग आधारित पदानुक्रम से जुड़ी हैं। पंजाब में सहकारी खेती और भूमि अधिकारों के लिए संघर्ष और तेलंगाना में भूमि अधिकारों की मांग जैसे आंदोलन कर रही हैं।
