झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में सामाजिक विकास के विमर्श में महिलाओं की भूमि अधिकार हमेशा से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कृषि गरीबी उन्मूलन लिंग आधारित हिंसा में कमी महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के संदर्भ में डब्ल्यू ए एल आर के महत्व पर चर्चा की गई है। व्यापक ,अकादमिक विरासत और सामाहिक कारवाई के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के भूमि अधिकार ,लैंगिक समानता को अधिक प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जब खेती की जमीन पर अधिकार और नाम की बात आती है तो उसमें कभी भी महिलाएं शामिल नहीं होती हैं।जमीन का अधिकार सिर्फ पुरुषों के नाम होता है।वह अधिकार महिला किसानों को क्यों नहीं मिलता है ? महिला के नाम पर जमीन सिर्फ उसी वक्त मिलता है जब उसका पति या पिता नही रहता है।ऐसी स्थिति में महिला के नाम पर जमीन करवाया जाता है।महिला के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराने में छूट मिलती है।यह देखते हुए परिवार वाले महिला किसान के नाम पर जमीन करवाते हैं।खाद प्रबंधन द्वारा जारी किए गए आंकड़े के अनुसार बारह प्रतिशत से भी कम महिला किसान के नाम पर जमीन है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जिला बांदा,बल्लान और नागावा गाँव में लगभग दस किसान महिलाओं से बात की गई जिनमें से सिर्फ तीन ही ऐसी महिलाएं थी जिनके नाम पर खेती की जमीन थी और वो भी सिर्फ इसी वजह से थी क्योंकि उनके पिता या पति नहीं थे।गांव की 53 वर्षीय आमना कहती है कि उनके पास पांच बीघा जमीन है। जिसमें से ढाई बीघा जमीन उनके पति के मारने के बाद उनके नाम हो गई।बाकी की ढाई बीघा जमीन उनके सास के नाम पर है।वह रोपाई,बुआई,खेत आवंटन आदि सारे काम करती हैं। जब उनसे सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उन्हें सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है।पैदावार अच्छा नही होने के कारण आजीविका चलाने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पंद्रह अक्टूबर महिला किसान दिवस के मौके पर खबर लहरिया टीम ने खबर दिया था कि जब महिला किसान से उसकी लागत के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि साऐ दस हजार खेती में लग जाते है खेती करने के लिए उन्हें अपने गहनों को भी गिरवी रखना पड़ता है। कई बार उन्हें कर्ज भी लेना पड़ता है।क्योंकि उनके पास खेती के लिए जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं होते हैं।जब फसल अच्छी नहीं होती तो उन पर कर्ज और भी दोगुना हो जाता है। कर्ज लेकर खेती में पैसा लगा देते हैं। ऐसे में फसल खराब हो जाता है तो वह कर्ज दोगुना हो जाता है।छोटे किसानों को फसल से बहुत मुश्किल से जीविका चलती है।ऐसे में उनकी आय बिलकुल नही होती है।ऊपर से कर्ज का भार आय दिन बढ़ता रहता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वह महिलाएं जो अपने जमीन पर खेती करती हैं,जो अपने पारिवारिक जमीन पर खेती करती हैं या जो किराए पर ली हुई जमीन पर खेती करती हैं,उनको महिला किसान कहा जाता है। अगर हम महिलाओं के नजरिए से देखें तो वो सभी महिलाएं जो खेत में किसी भी तरह का काम करती हैं,जैसे - बटाई,खेत में मजदूरी या पशुपालन,इत्यादि।सभी महिलाओं को महिला किसान कहेंगे ना कि किसी अन्य नाम से जानेंगे।महिला किसान अधिकार मंच की सुलेखा ने बताया कि जब पति कमाने के लिए बाहर जाता है तो वह खेती की सारी जिम्मेदारी महिला पर छोड़कर जाता है।लेकिन खेत उसके नाम नहीं करता है। महिला को किसी भी तरह की मान्यता नहीं मिलती है।ऐसी महिलाएं भी महिला किसान हैं जो मिट्टी के ढेर में से धान घर लाती हैं और घंटो मेहनत करके धान को साफ करती हैं। ताकि वो अपने परिवार का भरण - पोषण कर सके।

विष्णुगढ़ प्रखंड के सारूकुदर पंचायत अंतर्गत चिहूंटीया जाने वाली मार्ग में तक्षशिला स्कूल फॉर्म का स्थापना किया गया जिसका विधिवत उद्घघाटन मांडू के पूर्व विधायक एवं हजारीबाग जिला के कांग्रेस जिला अध्यक्ष जयप्रकाश पटेल ने पूजा अर्चना फीता काटकर शुभारंभ किया। मौके पर विद्यालय संचालक घनश्याम महतो निरंजन महतो कोकील चंद महतो टेकलाल महतो गुलाब राम अनिल राय उत्तम महतो महेश महतो धर्मेंद्र महतो मंसूर अंसारी भोला महतो सफायत अंसारी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

विष्णुगढ़ थाना परिसर में शांति समिति की बैठक की गई जिसमें रंगों का त्यौहार सौहार्द वातावरण में मनाने का संकल्प लिया गया बैठक की अध्यक्षता थाना प्रभारी सपन कुमार महथा ने किया संचालन पूर्व विधायक प्रतिनिधि गुरु प्रसाद साव ने किया इस बैठक में बात रखी गई की होली का त्यौहार आपसे प्रेम भाईचारे के साथ मनाए किसी भी तरह का अफवाह ना फैलाएं कुछ संदिग्ध सूचना मिलती है तो स्थानीय प्रशासन को जरूर जानकारी दें।

विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय सभागार में 11 फरवरी को लौटे दुबे से अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिकों के साथ प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के टीम ने उनसे रूबरू होते हुए उनकी समस्याओं के बारे में चर्चा किया गया साथ ही झारखंड सरकार श्रम विभाग के द्वारा पुनर्वासन हेतु सूचना संकलन पत्र संग्रह किया गया एवं ईएमसी कंपनी में बकाया राशि एवं किराए भुगतान करने के संबंध में आवेदन लिया गया पीटीआई के वरिष्ठ संवाददाता सौरभ शुक्ला कैमरामैन कौशल कुमार विष्णुगढ़ श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी विकास कुमार श्रमिक मित्र राजेश्वर महतो प्रवासी श्रमिक त्रिलोकी महतो दिलीप कुमार महतो दीपक कुमार बैजनाथ महतो गंगाधर महतो जागेश्वर महतो के पत्नी प्रमिला देवी मौजूद रहे।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं के अधिकार मानवाधिकार है इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार ,उच्चतम स्तर की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आनंद लेने का अधिकार ,शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार , संपत्ति रखने का अधिकार, मतदान करने का अधिकार और समान वेतन अर्जित करने का भी अधिकार शामिल है। महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहिए। महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है

परंपरा तभी बदलेगी, जब सोच बदलेगी। जब समाज यह समझेगा कि महिलाओं को भूमि और संपत्ति में समान अधिकार देना परिवार और राष्ट्र दोनों के हित में है, तभी भारत वास्तविक अर्थों में समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ेगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *---- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *---- हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *---- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”