जिले में सरकारी नलकूपों से सिंचाई व्यवस्था बेपटरी है। राजकीय नलकूप से सिंचाई सुविधा नदारद है। कृषि प्रधान जिले में सिंचाई व्यवस्था को अबतक दुरस्त नहीं किया जा सका है। जिससे किसान निजी सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर हैं। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर सिंचाई व्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में कार्रवाई ठंडे बस्ते में है। जिले में 612 सरकारी नलकूप संचालित हैं। लेकिन इसमे 285 ही कागजी रूप से चालू हैं। लेकिन जो चालू नलकूप हैं उसके संचालन के लिए मात्र चार ऑपरेटर हैं। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि चार ऑपरेटर वाले नलकूपों को छोड़ बाकी का कैसे संचालन होेता है जो चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय आंकड़े के अनुसार लघु जलसंसाधन विभाग मोतिहारी अंतर्गत 200 पद ही ऑपरेटरों के पद स्वीकृत है। जिसके विरूद्ध मात्र चार ऑपरेटर ही तैनात हैं। शेष नलकूपों पर ऑपरेटर की नियुक्ति के लिए पंचायतों को अधिकार दिया गया है। इसके बावजूद किस नलकूप पर पंचायत स्तर से ऑपरेटर की नियुक्ति की गयी है,इस संबंध में विभाग को किसी तरह की कोई सूचना नहीं है। जबकि विभाग के पास ग्रामीण क्षेत्रों से ऑपरेटर के अभाव में नलकूप के संचालन नहीं होने की शिकायतें लगातार मिल रही है। विभाग का कहना है कि पंचायत स्तर पर पटवन शुल्क के रूप में 50 रुपये घंटा वसूल करना है। इससे छोटी मोटी मरम्मत सहित ऑपरेटर को नलकूप संचालन के लिए रखना है। कार्यपालक अभियंता ई मिथिलेश कुमार का कहना है कि इस डिविजन अंतर्गत मात्र चार ऑपरेटर कार्यरत हैं। शेष नलकूपों पर पंचायत को ऑपरेटर रखने के लिए सरकार के द्वारा अधिकृत किया गया है।