प्रचंड गर्मी से भूगर्भ जलस्तर में भारी गिरावट आयी है। जलस्तर में गिरावट से चापकल तक सूखने लगे हैं। चापाकल सूखने से पेयजल निकालने के लिए लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। भूगर्भ जलस्तर नीचे जाने से मोटरपंप से पानी चढ़ाने में लोगों की परेशानी बढ़ गयी है। पहले की तुलना में अधिक समय तक मोटरपंप चलाने पर पानी टंकी भर रही है। विगत चार पांच दिनों से चापाकल से पानी का लेवल नीचे जाने की समस्या खड़ी हो रही है। बारिश नहीं हुई तो गिरते जलस्तर से जिले में जलसंकट गहराने के आसार बढ़ गये हैं। पीएचईडी मोतिहारी के आंकड़े के अनुसार भीषण गर्मी से मोतिहारी प्रखंड में 31 मई को भूगर्भ जलस्तर में सर्वाधिक 18.8 फुट गिरावट दर्ज की गयी है। इस तरह विगत तीन माह में 3.6 फुट भूगर्भ जलस्तर में कमी आयी है। विगत 28 फरवरी को मोतिहारी प्रखंड में भूगर्भ जलस्तर 15.2 फुट दर्ज किया गया था। इसके अलावा अरेराज में 10.6 फुट, केसरिया व संग्रामपुर में 8.11-8.11 फुट, पहाड़पुर में 15.4 फुट,रक्सौल में 14.3 फुट, रामगढ़वा में 15.6 फुट, सुगौली में 14.3 फुट,कल्याणपुर 13.11 फुट,कोटवा 15.11 फुट, बंजरिया 12.1 फुट,पीपराकोठी 12.10 फुट,तुरकौलिया 14 फुट, हरसिद्धि 13.5 फुट,छौड़ादानो 12.10 फुट, आदापुर 13.5 फुट, घोड़ासहन 15.7 फुट, बनकटवा 15.7 फुट, ढाका 14.5 फुट,पताही 14.6 फुट, चिरैया 17 फुट, पकड़ीदयाल 13.7 फुट, चकिया 13.4 फुट,मधुबन 13.6 फुट, मेहसी 12.11 फुट,फेनहारा 15 फुट व तेतरिया प्रखंड में 11.2 फुट भूगर्भ जलस्तर में गिरावट दर्ज की गयी है। इधर पीएचईडी के सहायक अभियंता ई जोबैर आलम ने बताया कि गर्मी के कारण भूगर्भ जलस्तर में गिरावट आयी है। सभी प्रखंडों में भूगर्भ जलस्तर की जांच कराने पर यह समस्या देखी जा रही है।