सरकारी स्कूलों में गर्मी की छुट्टी शुरू होने वाली है, लेकिन 40 फीसदी बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक किताबों का इंतजार है। हालांकि, मुख्यालय से 72 फीसदी बच्चों को लिए किताबें भेज दी गयी हैं। अभी 60 फीसदी बच्चों तक ही किताबें पहुंच सकी हैं। मुख्यालय ने 1.28 करोड़ किताबें सभी जिलों के लिए आवंटित की हैं। इनमें 91.32 लाख किताबें ही पहुंची हैं। इनमें भी बड़ी संख्या में किताबें अभी तक प्रखंडों में ही हैं। पुस्तक वितरण का यही हाल रहा तो जुलाई तक पुस्तकें बंटती रहेंगी। इस बार शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से 8वीं तक के बच्चों को पैसे देने की बजाए पाठ्य-पुस्तकें वितरित कर रहा है। लगभग पौने दो करोड़ बच्चों में किताब बांटने की योजना है। पांच वर्षों बाद राज्य सरकार स्कूली बच्चों को पाठ्य पुस्तक दे रही हैं। पहले सरकार बच्चों को किताब के बदले पैसे देती आ रही थी। इसके तहत वर्ग 1-4 तक के बच्चों को 250 रुपए जबकि वर्ग 5 से 8 तक के बच्चों को 400 रुपए दिये जाते थे। प्रदेश भर में मना पुस्तकोत्सव स्कूली बच्चों में किताब बांटने के लिए शिक्षा विभाग ने 11 अप्रैल से 15 मई तक पूरे प्रदेश में पुस्तकोत्सव मनाया। इस दौरान सभी बच्चों को पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध करवा देना था, लेकिन अवधि बीत जाने के बाद भी आधे बच्चे अपनी किताब का इंतजार करते रह गए। अब मई खत्म होने को है, 40 फीसदी बच्चे अब भी किताब के इंतजार में हैं। इस समय 20 जिलों में 80 फीसदी किताबें पहुंची हैं। पांच वर्ष रहले सरकार ने पुस्तक के बदले पैसा देने का निर्णय लिया था। लेकिन, अधिसंख्य बच्चों ने पैसा मिलने के बाद भी पुस्तकें नहीं खरीदीं। पिछले चार वर्षों में 20 फीसदी से भी कम बच्चों ने किताबें खरीदी। पहले साल 13 फीसदी, दूसरे साल 19, तीसरे साल 11 फीसदी बच्चों ने ही किताबें खरीदीं। जबकि, इस दौरान बच्चों के खाते में 1600 करोड़ रुपए भेजे गए।