सभी विकलांग बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी प्रमाण-पत्र की बजाय दिव्यांगों की पहचान से संबंधित यूडीआईडी कार्ड जारी होगा। इसके लिए विकलांग लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद उनकी दोबारा स्क्रिनिग होगी। स्क्रीनिंग के बाद विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसी विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर बच्चों को अन्य कार्ड भी बनेगा। इस संदर्भ में जिलाधिकारी ने पत्र लिखकर 0-18 वर्ष के बच्चों का कार्ड बनाने को आदेशित किया है। इसके के प्रखंडवार तिथि का निर्धारण किया गया है। कैम्प में दिव्यांगता की जांच, सह मूल्यांकन, प्रमाण पत्र व यूडीआईडी कार्ड बनाया जाएगा इस आईडी की पूरे देश में मान्यता होगी। नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके साथ ही दिव्यांगों का स्कैनिंग भी किया जायेगा। पहले की व्यवस्था में दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने पर जिला स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों का पैनल जांच करता है। इसके बाद प्रतिशत के हिसाब से दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करता है। जारी किया जाएगा यूनिक नंबर नई व्यवस्था में पहले दिव्यांगों का ब्योरा दर्ज किया जाएगा। जिससे स्क्रीनिंग के बाद दिव्यांग की पूरी स्थिति को दर्ज किया जा सके और दर्ज करने के वाद ही उन्हें यूनिक नंबर जारी किया जाएगा। फिर स्वास्थ्य विभाग विकलांगता प्रमाण पत्र जारी करेगा। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से नामित की गई कंपनी की ओर से कार्ड जारी किया जाएगा। प्रमाण पत्र और कार्ड में विकलांगता का प्रकार, प्रतिशत और आईडी नंबर होगा। कार्ड में चिप भी लगाई जाएगी। कार्ड से पूरी जानकारी मिल जाएगी। कार्ड से मिलेगी पेंशन समाज कल्याण के माध्यम से योजनाओं का लाभ उठाने वाले दिव्यांगों के पास यूनिक आईडी कार्ड होना जरुरी है। इसके बिना किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसी के माध्यम से ही दिव्यांगों को पेंशन दिया जाएगा।
