राज्य के सभी 38 जिलों में मनरेगा के तहत डेढ़ करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इसमें दोनों तरह फलदार व इमारती लकड़ी वाले पौधे होंगे। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने बड़े पैमाने पर बारिश होते ही 15 जून बाद राज्यभर में आरंभ होने वाले पौधारोपण की तैयारियां शुरू कर दी है। दो सौ पौधे लगाने पर सरकार चापाकल लगवाएगी। पौधरोपण मनरेगा के तहत कराने से दो बड़े फायदे होंगे। पहला कि व्यापक पैमाने पर कामगारों को रोजगार मिलेंगे। दूसरा, बड़ी संपदा आने वाले समय के लिए तैयार होगी। संपदा भी सरकारी और निजी दो स्तर के होंगे। पौधे राज्यभर की सड़क, खाली जमीन, नदी, तालाब, नहर के किनारे लगेंगे। लोग अपनी निजी जमीन पर भी मनरेगा मजदूरों से पौधे लगवा सकते हैं। ग्रामीण विकास विभाग योजना को अंतिम रूप देने में जुट गया है। पहले से चयनित योजनाओं का स्थल निरीक्षण होगा। सरकारी महकमों के अलावा पंचायत, प्रखंड और जिलास्तर पर मांगें प्राप्त की जाएंगी। फिर डाटा इंट्री के बाद पौधों की जरूरत का आकलन होगा। पौधे कहां से आएंगे इसकी तैयारी की जाएगी। मनरेगा के तहत लगने वाले पौधों की अधिकांश जरूरतें जीविका दीदियों की पौधशाला से पूरी करने की तैयारी है। उसके बाद वन विभाग की नर्सरी से पौधे लिए जाएंगे। तब भी मांगें पूरी नहीं हुई तो टेंडर किया जाएगा। टेंडर तीन कार्यों के लिए होगा। पौधा, चापाकल की गड़ाई और घेरा (बांस या लोहे की कमानी से) करने के लिए। वेंडर तय करने समेत तमाम प्रक्रियाएं जून के पहले सप्ताह में पूरी करनी होगी।