भीषण गर्मी के कहर का असर निजी नलकूपों पर दिखने लगा है। भूजल स्तर नीचे जाने से निजी नलकूप सूखने लगे हैं।नलकूपों के सूखने से पानी नहीं निकल रहा है। इससे सिंचाई पर ग्रहण लगने लगा है। ऐसा वाक्या मोतिहारी प्रखंड के आधा दर्जन गांवों में दिखने लगा है। जिससे सैकड़ों में सिंचाई कार्य प्रभावित हो गया है। खरीफ मौसम के लिए धान का बिचड़ा गिराने के लिए खेत में सिंचाई कार्य पर काफी असर पड़ा है। सब्जी उत्पादक किसानों को सब्जी फसल की सिंचाई के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। पंपसेट से पानी निकालने के लिए मशक्कतनिजी नलकूपों से सिंचाई के लिए किसान पंपसेट का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन पंपसेट चालू करने के बाद भी बोरिंग से पानी नहीं निकल रहा है। कुछ जगह काफी मशक्कत के बाद बोरिंग से पानी निकल भी रहा है तो उससे सिंचाई करने में अधिक समय लग रहा है। जिससे डीजल पंपसेट से सिंचाई करना किसानों को महंगा पड़ रहा है। मोतिहारी प्रखंड के कई गांव हुए प्रभावितभूजल स्तर नीचे चले जाने से सिंचाई कार्य प्रभावित होने का असर कई गांवों पर पड़ा है। मोतिहारी प्रखंड के बसवरिया, मठिया, सिरसा,गोढ़वा आदि गांवों में निजी नलकूपों से सिंचाई प्रभावित हुआ है। बसवरिया के किसानश्री ललन प्रसाद शुक्ला ने बताया कि भूजल स्तर नीचे जाने से निजी नलकूपों से सिंचाई कार्य बाधित हो गया है। लाख मशक्कत के बाद भी कई निजी नलकूपों से पानी नहीं निकल रहा है। जिससे धान का बिचड़ा गिराने के लिए खेत की सिंचाई नहीं हो पा रही है। बसवरिया के किसान छोटेलाल सहनी ने बताया कि पानी का लेयर नीचे चले जाने से निजी बोरिंग से पानी नहीं निकल रहा है। गोढ़वा के किसान हरेन्द्र प्रसाद,कृष्णा प्रसाद आदि ने बताया कि गर्मी ज्यादा पड़ने से सब्जी की खेती में सिंचाई की अधिक जरूरत है। लेकिन भूजल स्तर नीचे चले जाने से सिंचाई में अधिक समय लग रहा है। गर्मी अधिक पड़ने से रोज रोज सिंचाई की आवश्यकता पड़ रही है लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। भूजल-स्तर गिरने से किसानों की बढ़ी परेशानी मधुबन। भूजल-स्तर नीचे गिरने से चापाकलों के साथ निजी नलकूप भी हकलाने लगे हैं। इससे खेतों में लगी फसल व आम लीची के बाग के फलों को बचाने में किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मूंग व सब्जी की खेती पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। वर्षा नहीं होने से खेतों की नमी भी सूख गयी है। खेतों की नमी सूखने से खरीफ की खेती के लिए खेतों को तैयार करने में किसान अक्षम साबित हो रहे हैं। किसान कृष्णा राउत,बच्चालाल सहनी,अनिल कुमार यादव आदि बताते हैं कि सूखे खेतों की जुताई नहीं हो पा रही है।