मोतिहारी एलएनडी कॉलेज में सोमवार को बीएड विभाग के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया है। राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय है ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में दर्शन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी’। मुख्य अतिथि प्रो.आशीष श्रीवास्तव, शिक्षा संकायाध्यक्ष, एमजीसीयू , मुख्य वक्ता डॉ सुभाष मिश्रा, भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ, विशिष्ट अतिथि प्रो.ज्ञानदेवमणि त्रिपाठी, भुतपूर्व संकायाध्यक्ष, एकेयू व प्राचार्य प्रो.(डॉ.) अरुण कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि प्रो.आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि आज मैकाले शिक्षा पद्धति को कोसने की अपेक्षा खुद ज़म्मिेदारियों के निर्वहन का समय है। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर की वृद्धि के लिए तकनीक एक सशक्त माध्यम हो सकता है। पाश्चात्य जगत हमारे पारंपरिक ज्ञान का नकल कर रहा है वहम अंधाधुंध पाश्चात्यीकरण में लीन हैं। पारंपरिक विज्ञान की गिरावट के मद्देनजर अमेरिकी नेक्स्ट जेनरेशन साइंस स्टैंडर्ड फ्रेमवर्क को भारत में भी आत्मसात करने के लिए प्रयास करना होगा।भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विवि, लखनऊ से आए मुख्य वक्ता डॉ सुभाष मिश्रा ने बताया कि एनईपी की आत्मा को स्थापित करने के लिए भौतिक व आध्यात्मिक जगत का समन्वय प्रस्तुत करता हुआ दर्शन एक अनिवार्य तत्व है। मनुष्य को ज्ञान दर्शन की ओर व विज्ञान प्रदर्शन की ओर ले जाता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में एकेयू के भुतपूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. ज्ञानदेवमणि त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विज्ञान/ तकनीकी को समझने के लिए प्राचीन हड़प्पा संस्कृति पर दृष्टिपात करनी होगी। प्राचार्य प्रो.(डॉ.) अरुण कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि जिज्ञासा का नाम ही दर्शन है। जिज्ञासा ही मनुष्य को आगे बढ़ाता है। राष्ट्रीय सेमिनार के आयोजन सचिव-सह- बीएड विभागाध्यक्ष डॉ.परमानंद त्रिपाठी ने सेमिनार का विषय प्रवर्तन किया। मीडिया प्रभारी डॉ. कुमार राकेश रंजन ने बताया कि प्रथम तकनीकी सत्र में एमडीडीएम कॉलेज, मुजफ्फरपुर से आगत सहायक प्राध्यापक डॉ.श्रीनिवास सुधांशु व डॉ. मनोज कुमार सहित अन्य ने शोध पत्रों को प्रस्तुत किया। इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ.सुबोध कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। मंच का सफल संचालन प्रो प्रियरंजन झा ने किया।
