सरकारी स्कूलों में बच्चों का ड्रॉप आउट चाइल्ड बैंक रोकेगा। पांचवीं और आठवीं कक्षाओं के बच्चों का अगली कक्षा में जाने का ट्रांजिशन रेट कम होता है।  स्कूलों से छात्र छात्राओं के ड्रॉप आउट रोकने के लिए यह आइडिया तैयार किया गया है। 5वीं और 8वीं के बच्चों का 'चाइल्ड बैंक' बनेगा। विभाग ने इसकी शुरुआत कर दी गई है। पांचवीं और आठवीं कक्षाओं के बच्चों का अगली कक्षा में जाने का सबसे कम ट्रांजिशन रेट होता है। इस महीने के अंत तक इन बच्चों का चाइल्ड बैंक बना लेना है। ताकि इन बच्चों को मिडिल व हाई स्कूल में शिफ्ट किया जा सके। जिस स्कूल में बच्चे पढ़ रहे और जिसमें आगे नामांकन होंगे, इन दोनों स्कूलों के परीक्षा के बाद इन बच्चों के करीबी स्कूल में नामांकन कराने के साथ ही इस बैंक से मिलान होगा। ताकि इन बच्चों को मिडिल व हाई स्कूल में शिफ्ट किया जा सके। जिस स्कूल में बच्चे पढ़ रहे और जिसमें आगे नामांकन होंगे, इन दोनों स्कूलों के हेडमास्टर इसका डाटा रखेंगे। मार्च में वार्षिक परीक्षा के बाद इन बच्चों के करीबी स्कूल में नामांकन कराने के साथ ही इस बैंक से मिलान होगा। बताया जाता है कि नीति आयोग की टीम ने 'चाइल्ड बैंक' बनाने का विचार दिया है। सभी प्राइमरी और मिडिल स्कूल पांचवीं व आठवीं के बच्चों का चाइल्ड बैंक बनाकर विभाग को शीघ्र ही सौंपेंगे। ताकि मार्च के बाद शुरू होनेवाले नामांकन में इससे मिलान हो सके। इसमें बच्चे का नाम, पता, पिता का नाम समेत सभी जानकारी रहेगी जिससे उस बच्चे तक हेडमास्टर पहुंच सके। बताया जाता है कि बच्चे 5वीं के बाद छठी में जा रहे हैं या नहीं और 8वीं के बाद 9वीं में नामांकन ले रहे कि नहीं, इसकी जवाबदेही केवल अभिभावकों की नहीं रहेगी, बल्कि एक बच्चे को लेकर दो स्कूल जवाबदेही उठाएंगे। जिस प्राइमरी स्कूल में बच्चा पढ़ रहा है, उस स्कूल के हेडमास्टर और संबंधित क्षेत्र के मिडिल स्कूल के हेडमास्टर की भी जवाबदेही रहेगी। इसी तरह कक्षा 8वीं से 9वीं में नामांकन को लेकर मिडिल और हाई स्कूल की जवाबदेही रहेगी।