*महंगाई चरम पर , जनता अपने आप को ठगा महसूस कर रहा* सब्जी के जायका बदल रहा, तो पेट्रोल का दाम बढ़ने से महंगाई आसमान पर -------------------------------------- शिवहर-----भारत में महंगाई दर भारतीय बाजारों में महंगाई को दर्शाती है। देश के साथ शिवहर में भी महंगाई के चपेट में आम जनजीवन अस्त व्यस्त है।रोजमर्रा में उपयोग होने वाला दैनिक सामानों की कीमत आसमान छूने से गरीबों एवं दैनिक मजदूरी करने वाले के साथ-साथ मध्यमवर्गीय परिवार की स्थिति भयावह हो गई है। दिन पर दिन पेट्रोल का दाम बढ़ने से मंहगाई दिन दुगनी रात चौगुनी की तरफ बढ़ रहा है वहीं सब्जियों के दाम आसमान पर होने से सब्जी के जायका बदल रहे हैं। एक आम जन में बताया है कि महंगाई के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार उतना ही दोषी है जितना जले पर नमक छिड़कना। आखिर मंहगाई पर कब अंकुश लगेगा। गौरतलब हो कि पेट्रोल की कीमत 95 रूपये प्रति लीटर के करीब है, पेट्रोल- डीजल की कीमत बढ़ने के कारण सभी सामानों के दाम आसमान पर है। 14.2 किलोग्राम गैस की कीमत 892 50 पैसा हो गया है। इससे पहले इसकी कीमत 867 50 पैसे थी। वहीं 19 किलोग्राम व्यवसायिक गैस सिलेंडर की कीमत 1713 रुपए है। जबकि सब्जियों को जायका बदलने में सरसों तेल एवं रिफाइंड तेल भी 150 प्रति लीटर पार हो गया है। वही सब्जियों में स्वाद बदलने के लिए प्याज भी आज 65 प्रति किलो तथा नया प्याज 55 प्रति किलो की दर से बिक रहा है। जबकि सदाबहार सब्जी आलू भी 25 से ऊपर बिक रहे हैं।जबकि इस समय आलू एवं प्याज का खेती से उपजने का मौसम है। हरी सब्जी की महंगाई भी चरम पर है। यही नहीं साधारण सा चावल भी 50 प्रति किलो की दर से बिक रहा है। यानी हर चीजों की कीमतें दोगुनी हो रही है अगर आप फल सब्जियों या किराने के सामान खरीदते हैं तो काफी भुगतान करना पड़ेगा । दाल, फल और सब्जियों के बढ़ते दाम चिंता का कारण बन गए हैं। 1947 के बाद भारत की अर्थव्यवस्था तकनीकी मंदी में प्रवेश कर रहा है जबकि खाद्य मुद्रास्फीति की समस्या जितनी दिख रही है उससे कहा कहीं ज्यादा बढी है। मांस मछलियों की बात करें तो कोई भी अच्छी मछली 250 रूपये से ऊपर है। जबकि मटन 600 प्रति किलो की दर से बिक रहा है। ऐसे में गरीब व मजदूर जो 300 की दिहाड़ी पर काम कर जीवन यापन करते हैं उनके लिए मौजूदा हालात बद से बदतर है। मध्यम वर्गीय परिवार भी मंहगाई की चपेट में है। ऐसे में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को तीन महंगाई के दौर से जीवन गुजारना टेढी खीर साबित हो रही है।