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उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी ज़िला के बड़ागांव प्रखंड से अनीस की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से भारती से हुई। भारती कहती है कि वो अपने मनिहारी का दूकान खोलने के लिए लोन चाहती है। लगभग एक लाख का लोन की ज़रुरत है। बच्चों का भविष्य के लिए यह कारोबार करना है। अन्य लोगों को भी नौकरी देना है

उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी ज़िला से अनीस मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि करीब एक माह पूर्व झाँसी मोबाइल वाणी में मध्यप्रदेश राज्य के ज़िला नेवाड़ी के केना ग्राम की लगभग 30 महिलाओं ने अपनी बात रिकॉर्डिंग करवाई थी कि उन्हें सिलाई का प्रशिक्षण लेना है। जिसके बाद झाँसी मोबाइल वाणी की टीम ने हसारी आरसेटी की मदद से टीकमगढ़ आरसेटी से संपर्क किया। टीकमगढ़ आरसेटी के अधिकारी विवेक विश्वकर्मा ने सहयोग दिया और इसके अंतर्गत 31 अगस्त को अधिकारी विवेक विश्वकर्मा केना ग्राम पहुंचे और महिलाओं की कॉउंसलिंग की। महिलाओं को समझाया कि सिलाई का प्रशिक्षण लेने से बेहतर है कोई नॉन ट्रेडिशनल काम करे। इस पर आर्टिफीसियल ज्वेलरी बनाने की बात सामने आई। जिसको मार्केट में आसानी से बेचा जा सकता है। इसके बाद अधिकारी विवेक विश्वकर्मा ने महिलाओं का पंजीकरण करना शुरू कर दिया। अब महिलाओं का जब पंजीकरण पूर्ण हो जाएगा तो उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग के पश्चात उन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसी सर्टिफिकेट के माध्यम से महिलाओं को आश्यकता होने पर आसानी से सरकारी लोन मिल जाएगा और इसके ज़रिये उनका कारोबार शुरू करवा दिया जाएगा। कारोबार को मार्केट से जोड़ने के लिए झाँसी मोबाइल वाणी हर संभव प्रयास करेगी। उन्हें सोशल मीडिया से जोड़ेगी ताकि महिलाएँ अपने माल को ग्राहकों तक पहुँचा सके। महिलाएँ यह काम समूह के तौर पर करना चाहती है और अपना यह ब्रांड को सामने लाना चाहती है। इसमें झाँसी मोबाइल वाणी भरपूर सहयोग करने को तैयार है।

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उत्तरप्रदेश राज्य के झाँसी ज़िला के चिरगाँव प्रखंड से मोबाइल वाणी संवाददाता अनीश की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से पुष्पा से हुई। पुष्पा कहती है कि गाढ़ीबान समूह की महिलाएँ दाल ,दलीया, बेसन ,पापड़ बनाने की मशीन व चक्की घर में लगाए है। समूह में कुल 15 दीदियाँ है जो इस कारोबार से जुड़ी है। दीदियाँ वर्ष 2022 से यह कारोबार चला रही है। इस कारोबार के लिए इन्होने सबसे पहले एक लाख का लोन लिया ,तब इनके पास कुछ भी नहीं था। 50 हज़ार तराज़ू ,मशीन ,चक्की आदि में खर्च हो गया। बाकि 50 हज़ार से थोड़ा थोड़ा सामान ले कर कारोबार शुरू हुआ। अब लाखों में आर्डर आ रहे है। कारोबार का प्रचार भी अच्छे से हुआ जिससे गांव से लोग आकर सामान ले जाते है। वहीं कही भी कोई कार्यक्रम होता है तो स्टॉल गया जाता है। अभी महिलाएँ कही भी जा कर काम करती है जहाँ से आर्डर आता है। आस पास के लोग तो बोलते रहते थे पर परिवार का सहयोग से ये महिलाएँ आगे बढ़ रही है। साथ ही इन्होने बताया कि हकदर्शक से इन्होने प्रशिक्षण लिया। तीन दिन की ट्रेनिंग की। सबसे पहले वृद्धा ,विकलांग व विधवा पेंशन की पूरी जानकारी मिली और आयुष्मान कार्ड बनाने की जानकारी भी मिली। ये लोग आयुष्मान कार्ड भी बनाती है जिसका 50 रूपए चार्ज लेती है। इसमें इन्हे 15 - 20 रूपए मिल जाता है। इसका कार्य भी शुरू करने के लिए कस्टमर इन्होने बना लिया है। अभी रक्षा बंधन त्यौहार के बाद से कार्य को रफ़्तार में लाएंगी।

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