झांसी जिले के चिरगांव ब्लॉक से महिलाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है।झांसी मोबाइल वाणी टीम के कई दिनों के लगातार प्रयासों के बाद आज आईआरसीटीसी, झांसी के अधिकारी श्री अनुराग जी ने चिरगांव ब्लॉक के धमना खुर्द गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गांव की कई महिलाओं का पंजीकरण किया।
अगर आप झांसी जिले के रहने वाले हैं और बेरोजगार हैं, या अपने रोजगार और बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो आपके लिए यह एक शानदार मौका है। अपनी जेब से मोबाइल निकालिए और झांसी मोबाइल वाणी के टोल-फ्री नंबर 9899 383851 पर मिस्ड कॉल दीजिए।जैसे ही आपकी मिस्ड कॉल खत्म होगी, 5 सेकंड के अंदर आपके पास एक दूसरे नंबर से कॉल आएगी। उस कॉल को रिसीव करें और नंबर 3 का बटन दबाएं। इसके बाद अपनी बात, अपना नाम, अपना पता और अपना बिजनेस आइडिया रिकॉर्ड करें और रिकॉर्डिंग पूरी होने के बाद नंबर 2 का बटन दबाएं। आपकी जानकारी मिलते ही झांसी मोबाइल वाणी की टीम आपसे संपर्क करेगी।
झांसी जिले के बड़ा गांव ब्लॉक अंतर्गत बरुआ सागर के एक मोहल्ले में झांसी मोबाइल वाणी द्वारा ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 40 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना था, ताकि वे अपने कौशल के आधार पर स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।बैठक के दौरान महिलाओं को सिलाई, ब्यूटी पार्लर, लघु उद्यम और अन्य स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया गया।
आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम जानेंगे एसएचजी यानि की स्वयं सहायता समुह से जुड़ने के क्या फायदे हैं और इससे जुड़ कर कैसे आप अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं।
आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.
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भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
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कल के नेता, आज की आवाज़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक आह्वान है—युवाओं के लिए, समाज के लिए और नीति निर्माताओं के लिए। यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं, तो वे भूमि न्याय के आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य का भारत तभी सशक्त और न्यायपूर्ण होगा, जब आज की युवा आवाज़ भूमि पर समान अधिकार की मांग को मजबूती से उठाएगी। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- “हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *--- “अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
परंपरा तभी बदलेगी, जब सोच बदलेगी। जब समाज यह समझेगा कि महिलाओं को भूमि और संपत्ति में समान अधिकार देना परिवार और राष्ट्र दोनों के हित में है, तभी भारत वास्तविक अर्थों में समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ेगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *---- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *---- हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *---- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
