उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से रजनीश कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से महिलाओं के अधिकार के बारे में बता रहे है जैसे सामान वेतन ,घरेलू हिंसासे सुरक्षा ,काम काज़ी महिलाओं को मातृ सम्बन्धी लाभ ,मुफ़्त कानूनी मदद का अधिकार ,पुश्तैनी संपत्ति का अधिकार ,काम पर हुए उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत का अधिकार आदि

यह नौकरी उन लोगों के लिए है जो भारतीय डाक सर्किल द्वारा निकाली गयी ब्रांच पोस्ट मास्टर, असिस्टेंट ब्रांच पोस्ट मास्टर, एवं डाक सेवक के पद पर कार्य करने के लिए इच्छुक हैं। तीनों पदों पर कुल 44,228 रिक्तियां निकाली हैं। इन पदों के लिए मासिक वेतन 10,000 से 30,000 रूपए रखा गया है। वैसे उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से मैट्रिक पास किया हो।साथ ही आवेदन कर्ता की आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इन पदों के लिए आवेदन शुल्क सामान्य वर्ग के लिए 100 रूपए तथा आरक्षित वर्ग एवं महिलाओं के लिए निशुल्क रखा गया है। इच्छुक उम्मीदवार को अपना आवेदन ऑनलाइन भरना होगा। अधिक जानकारी के लिए आवेदन कर्ता इस वेबसाइट पर जाकर जानकारी ले सकते हैं, वेबसाइट है www.indiapostgdsonline.gov.in/आवेदनकर्ताओं का चयन मेरिट लिस्ट के आधार पर किया जायेगा। याद रखिये आवेदन करने की अंतिम तिथि 05/08/2024 है।

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से आलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से सुशील से बातचीत की। बातचीत में सुशील ने बताया की सरकार इस महिला अधिकार पर बहुत अच्छी पहल कर रही है जो एक राजनीतिक अधिकार है। राशन कार्ड और शिक्षा के रूप में उनकी पहल हर जगह अच्छी है और अब सरकार ने हर क्षेत्र में हर महिला को तीस प्रतिशत आरक्षण देना भी संभव बना दिया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि जहां भी उनका चयन किया जाएगा या अब जो कुछ भी होगा, उन्हें पहले तीस प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण दिया जाएगा, तभी इसमें कुछ नया जोड़ा जाएगा या नई भर्तियां की जाएंगी।

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से सरोज चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अपनी ज़मीन अपनी आवाज़ महिलाओं की स्थिति और स्वतंत्रता के बाद, यह कहना आवश्यक है कि स्थिति काफी अच्छी है। महिलाओं की प्रगति और स्वतंत्रता क्षेत्रों, समाजों और संस्कृतियों में भिन्न होती है, हालांकि शहरी क्षेत्रों में कुछ महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है और वे अधिक स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में, महिलाएं अभी भी सामाजिक संरचनाओं और मान्यताओं के कारण वंचित हैं जो अभी तक नहीं बनाई गई हैं। शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता ने महिलाओं को अधिक स्वच्छता और निर्णय लेने की क्षमता दी है। शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता महिलाओं के अपने निर्णय लेने की अधिक संभावना है कई देशों में महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की रक्षा के लिए कानून में सुधार किया गया है, लेकिन इन सुधारों का प्रभाव पूरी तरह से लागू नहीं किया जा रहा है। वहाँ की महिलाओं ने पिछले कुछ दशकों में महत्वपूर्ण प्रगति की है लेकिन पूर्ण स्वतंत्रता और समानता की दिशा में अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से सरोज चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से स्थानीय निवासी से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कई समाज पारंपरिक रूप से महिलाओं को भूमि के मालिक के रूप में मान्यता नहीं देते हैं। महिलाओं को भूमि अधिकार देने में सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं हो सकती हैं। कुछ देशों में महिलाओं के भूमि अधिकारों के बारे में कानून स्पष्ट नहीं हैं। कई महिलाओं को अपने भूमि अधिकारों के बारे में पता नहीं है, जो उन्हें महिलाओं के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए अपने अधिकारों का प्रयोग करने से रोकता है और भेदभावपूर्ण हो सकता है। प्रमाणन के लिए मजबूत संस्थागत समर्थन की कमी हो सकती है। इन बाधाओं के बावजूद, विभिन्न नीतिगत सुधारों और सामाजिक जागरूकता अभियानों के माध्यम से महिलाओं की भूमि में वृद्धि हुई है।

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से स्थानीय निवासी से बातचीत की। उन्होंने बताया कि महिलाओं को संपत्ति का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए ,आगे के समय में दिक्कत हो सकती है ।

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से स्थानीय निवासी से बातचीत की। उन्होंने बताया कि महिलाओं को संपत्ति का अधिकार मिलना चाहिए। जिससे महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सके और समाज में उनका भी मान सम्मान हो सके

उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के. सी. चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि दूषित पानी पीने के लिए लोग मजबूर हो रहे हैं सरकार द्वारा गांव में हैंडपंप लगाए जा रहे हैं लेकिन हैंडपंप पर अक्सर देखने को मिल रहा है वहां दुसित पानी मिलता है। दुसित पानी मिलने के चलते वहां निशान भी लगाया जाता है लेकिन व्यवस्था अभी भी वही है कि अधिकारी और कर्मचारी निशान लगाकर गायब हो रहे हैं। नल की स्थिति और दिशा में अभी तक सुधार नहीं हुआ है। गाँव वालों का कहना है कि गाँव में अब जो पानी की टंकी लगाई जा रही है, वह भी लगभग दो साल से इस स्थिति में पड़ा हुआ है, अपूर्णता के कारण पानी की आपूर्ति उपलब्ध नहीं है। अक्सर ग्रामीणों को दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकार को व्यवस्था नहीं करनी थी, तो नल पर निशान क्यों लगाया गया?

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...