उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जब हम महिलाओं और बालिकाओं में निवेश करते हैं, तो वास्तविकता में हम उन लोगों में निवेश कर रहे होते हैं, जो बाकी सभी क्षेत्रों में निवेश करते हैं। महिलाओं के महत्त्व को रेखांकित करता है, बल्कि उनकी उनकी प्रासंगिकता का भी विनिर्धारण करता है। क्या आपने कभी अपने आस-पास या पड़ोस में बेटी के जन्म पर ढ़ोल नगाड़े या शहनाइयाँ बजते देखा है? शायद नहीं देखा होगा और देखा भी होगा तो कहीं इक्का-दुक्का। वस्तुतः हम भारत के लोग 21वीं सदी के भारतीय होने पर गर्व करते हैं, बेटा पैदा होने पर खुशी का जश्न मनाते हैं और अगर बेटी का जन्म हो जाए तो शांत हो जाते हैं। महिलाओं की स्थिति में गिरावट की आशंका व्यक्त की जा रही है। इसलिये इस समस्या से निपटने में असाधारण सुधारात्मक नीतियों के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैंगिक समानता का अर्थ यह नहीं कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति एक लिंग का हो, अपितु लैंगिक समानता का सीधा सा अर्थ समाज में महिला तथा पुरुष के समान अधिकार, दायित्व तथा रोजगार के अवसरों के परिप्रेक्ष्य में है1। यह अवसर समाज के विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि महिला और पुरुष समाज के मूल आधार होते हैं।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से प्रियंका सिंह , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि महिलाओं और पुरुषों को जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अधिकार, जिम्मेदारियां और अवसर मिलने चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैंगिक असमानता को सबसे गंभीर सामाजिक समस्याओं में से एक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि महिला द्वारा घर के साथ-साथ विभिन्न पारिवारिक व्यावसायिक परिवेशों में भी इसका अनुभव किया जाता है। क्योंकि लड़कियों और महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम सक्षम माना जाता है। लड़कियों और महिलाओं में पुरुषों की तुलना में कम योग्यता और कौशल होना माना जाता है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लैंगिक असमानता प्रचलित है। ग्रामीण समुदाय के कुछ घरों में, लोग इस बात की सराहना नहीं करते हैं कि लड़कों की तुलना में लड़कियों का जन्म की ख़ुशी मनाई जाए।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैगिंक असमानता को व्यक्तिगत समुदाय और समग्र रूप से राष्ट्र की प्रगति में बाधा माना जाता है।इसलिए इस सामाजिक समस्या को रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए।कमजोर वर्गों से संबंधित व्यक्तियों को यह समझने की आवश्यकता है कि लड़कियां भी परिवार और समुदाय की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं और उन्हें अपने पुरुष समक्ष की तुलना में समान अधिकार और अवसर दिए जाने चाहिए।

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से श्रीदेवी सोनी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि बहुत महिलाएँ चाहे वो शहर की हो या ग्रामीण इलाके की लेकिन वो अभी भी शिक्षा से वंचित है। उनमे शिक्षा के प्रति जागरूकता ही नहीं है । शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के साथ अक्सर भेदभाव किया जाता है। महिलाओं के खिलाफ दहेज़ ,शोषण बढ़ रहा है। महिलाएँ अपने अधिकारों को खुद ही समझ नहीं पा रही है

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उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से श्रीदेवी सोनी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि जीवन का कोई भी पड़ाव क्यों न हो पर किसी का साथ जीवन के इस पड़ाव को पार करने में सहायता करता है। महिलाओं का साथ दें और लैंगिक असमानता दूर करें। महिलाओं को आगे बढ़ाए

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से वीर बहादुर ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि गर्मी से तालाब में पानी नहीं है। मनरेगा के तहत पानी भरवाना चाहिए। साथ ही सड़क के दोनों तरफ वृक्ष लगाना चाहिए जो पर्यावरण के लिए अच्छा होगा