उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के बनकटवा से प्रिंशु पांडेय की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से कोमल से हुई। ये कहती है कि इन्हे पैकिंग का व्यापार करना है। इन्हे आर्थिक सहयोग की ज़रुरत है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रिंशु पांडेय की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से रिया पांडेय से हुई। ये कहती है कि इन्हे केक का व्यापार करना है। इन्हे आर्थिक सहयोग की ज़रुरत है
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से विभा की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से ममता से हुई। ये कहती है कि इन्हे दलीया पैकिंग का काम करना है। आर्थिक सहयोग मिले तो अच्छा होगा
यह एपिसोड बताता है कि हम अपने रोज़मर्रा के जीवन में कैसे छोटे-छोटे बदलाव करके बिजली और पानी बचा सकते हैं। इससे न सिर्फ हमारा खर्च कम होगा, बल्कि हम अपनी धरती की भी रक्षा कर पाएंगे। आसान तरीकों से हम सभी मिलकर पर्यावरण को बचाने में मदद कर सकते हैं।क्या आपने भी अपनी ज़िन्दगी में कुछ ऐसे बदलाव किए हैं? अगर हाँ, तो हमें बताइए।
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रियंका की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से शिक्षक अलोक कुमार वर्मा से हुई। ये कहते है कि महिलाएं समाज की आधार है, महिलाओं को शिक्षित होना ज़रूरी है।महिला शिक्षित नहीं होगी तो समाज नहीं बढ़ेगा , सरकार इसको लेकर तमाम प्रयास कर रही है। साथ ही पिता की संपत्ति में महिलाओं को भी हिस्सा मिलना चाहिए। महिला परिवार की अंग है
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रियंका की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सुमन सिंह से हुई। ये कहती है कि महिलाओं को शिक्षित होना ज़रूरी है।महिला शिक्षित होगी तभी आगे बढ़ेगी, साथ ही पिता की संपत्ति में महिलाओं को भी हिस्सा मिलना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रियंका की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से ख़ुशी से हुई। ये कहती है कि महिलाओं को शिक्षित होना ज़रूरी है। साथ ही पिता की संपत्ति में महिलाओं को भी हिस्सा मिलना चाहिए। तभी महिलाऐं आगे बढ़ेगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रियंका की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक महिला से हुई। ये कहती है कि महिलाओं को शिक्षित होना ज़रूरी है। साथ ही पिता की संपत्ति में महिलाओं को भी हिस्सा मिलना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रियंका की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से भोला सिंह से हुई। ये कहते है कि महिलाओं को पढ़ना ज़रूरी है। साथ ही पिता की संपत्ति में महिलाओं को भी हिस्सा मिलना चाहिए।
दोस्तों, हमारे आपके बीच ऐसी महिलाओं के बहुत से उदाहरण हैं, पर उन पर गौर नहीं किया जाता. अगर आपने गौर किया है तो हमें जरूर बताएं. साथ ही वे महिलाएं आगे आएं जो घंटों पानी भरने और ढोने का काम करती हैं. उनका अपना अनुभव कैसा है? वे अपने जीवन के बारे में क्या सोचती हैं? क्या इस काम के कारण उनका जीवन नरक बन रहा है? क्या वे परिवार में पानी की आपूर्ति के चक्कर में अपना आत्मसम्मान खो रही हैं? क्या कभी ऐसा कोई वाक्या हुआ जहां पानी के बदले उनसे बदसलूकी की गई हो, रास्ते में किसी तरह की दुर्घटना हुई हो या फिर किसी तरह के अपशब्द अपमान सहना पडा?
