उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के हरैया सतगढ़वा प्रखंड से श्री देवी सोनी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से अंजलि कसोधन से हुई। अंजलि कहती है कि उन्हें व्यापार बढ़ाने के लिए पैसों की आवश्यकता है
दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से 47 वर्षीय विद्या यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होना चाहिए
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से मोबाइल वाणी के माध्यम से सनोज कहते हैं कि उन्हें सोलर पैनल की आवश्यकता है
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से मोबाइल वाणी के माध्यम से सनोज कहते हैं कि भैंस पालन के लिए पच्चास हजार रूपये लगते हैं
आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे और जानेंगे सरकारी बीमा योजना से जुड़ी जानकारी
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से 25 वर्षीय रीता यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि लड़कियों के नाम भी खेत होना चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रमोद कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि भैंस पालन के लिए एक लाख रूपए की आवश्यकता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से 55 वर्षीय बिमला यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होना चाहिए।
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से मोबाइल वाणी के माध्यम से 40 वर्षीय मेनका कहती हैं कि औरतों के नाम जमीन होनी चाहिए
