उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि किसी भी महिला को ऑफिस के सीनियर सहकर्मी या सीनियर स्टाफ के सामने आने पर खड़े हो कर सम्मान देना चाहिए या नही ?इस प्रकार की शिष्टाचार की उम्मीद करना क्या नारी के प्रति ज्यादती नहीं है ? किसी भी ऑफिस में महिलाओं और पुरुषों के कारण काम नहीं बदला जा सकता है, दोनों को एक ही काम करना पड़ता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
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पानी टंकी के बनाने के लिए नहीं रखा गया एक भी ईट और गांव के बाहर लगा दिया गया बोर्ड
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उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से नीलू ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि मौसम गर्म हो रहा है। जिससे बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वर्तमान में महिला समाज को भूमि/संपत्ति संबंधी अधिकार से वंचित रखना वास्तव में उस आधी आबादी अथवा आधी दुनिया की अवमानना है जो एक माँ, बहन और पत्नी अथवा महिला किसान के रूप में दो गज जमीन और मुट्ठी भर संपत्ति की वाजिब हकदार है।भारत में महिलाओं के भूमि तथा संपत्ति पर अधिकार, केवल वैधानिक अवमानना के उलझे सवाल भर नहीं हैं बल्कि उसका मूल, उस सामाजिक जड़ता में है जिसे आज आधुनिक भारत में नैतिकता के आधार पर चुनौती दिया ही जाना चाहिये। भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में से है जहाँ संवैधानिक प्रतिबद्धता और वैधानिक प्रावधानों के बावजूद महिलाओं की आधी आबादी आज भी धरातल पर अपनी जड़ों की सतत तलाश में है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पुरुष महिला को अपना सत्तात्मक समाज प्रभुता केसबसे महत्वपूर्ण साधन भूमि को किसी भी स्थिति में महिला को सौंपने को तैयार नही है । कारण यह है कि महिला स्वयं अपने अधिकार को कई व्यक्तिगत और सामाजिक कारणों से छोड़ देती है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
दुनियाभर के देशों से तुलना करें तो भारत की महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे अधिक पिछड़ी हुई हैं। पिछले दिनों वैश्विक महामारी के कारण उनकी स्थिति पहले से बदतर ही हुई है। देश की अस्सी प्रतिशत महिलायें कृषि क्षेत्र में कार्यरत है। लेकिन उनमें से मात्र 13 प्रतिशत महिलाओं के पास खेती की जमीन पर मालिकाना हक़ है। महिलाओं को भूमि अधिकार मिलना उनका सशक्त होना। इस अधिकार से उनकी वित्तीय आय,आश्रय और आजीविका के अवसर प्रदान करता है
