उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन दिनों महिला सशक्तिकरण का ज्वार आया हुआ है। ऐसा लगता है जैसे लोगों को अचानक से महिलाओं के अधिकार और विकास की बात याद आ गई हो। चलो मान लिया कि जब जागो, तभी सवेरा। आश्चर्य तो इस बात का है कि अभी भी सारी चर्चा, सारा विमर्श, केवल एक प्रकार के अपराधों के ही इर्दगिर्द घूम रहा है। उस मानसिकता पर प्रश्न नहीं उठाया जा रहा है जो स्त्री को वस्तु-मात्र मानती है, जिसका, हद-से-हद, उदारता से ओतप्रोत पुरुष संरक्षण कर सकते हैं। हम छोटी-छोटी चीजों में पुरुष प्रधान, पुरुष-सत्तात्मक समाज की झलकों को अनदेखा कर देते हैं, कदाचित इसलिए की हम उन्हें देखने के इतने आदी हो गए हैं।नारी के रूप में रहकर ही महिलाओं को समाज में सम्मान मिल सकता है। पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता का वास्तविक मानदंड नई चेतना, आत्मनिर्भरता, एक नया विचार, एक आधुनिक दृष्टिकोण है, दोनों के बीच समानता के बजाय, आपसी समझ में सहयोग लाने की बहुत आवश्यकता है।