उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं की पुरुषों के साथ समानता तब तक संभव नहीं है जब तक महिलाएं गृहस्थी के कार्यों तक ही सीमित रहेंगी। महिला को केवल संतान पैदा करने, अपने पति की देखभाल करने और उसे घर के काम सम्पादित करने के माध्यम से जाना जाता है।उसे घर की दासी बना दिया जाता है। जब वह काम पर जाती है, तो उसे पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है। इस प्रकार से सामाजिक न्याय और मानवाधिकार का यह तकाज़ा महिलाओं को उनके आर्थिक समस्या से मुक्त किया जाना और उन्हें आर्थिक रूप से सहभागी एवं स्वावलम्बी बनाना चाहिए।
