उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रियंका सिंह ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि घरेलु हिंसा से पीड़ित आक्रामक नहीं होते है। लोग ही उनका सहयोग कर सकते है। पुरुषों को ही इस समाधान का हिस्सा बनाए जाए। घरों से ही पुरुषों को समानता की परिभाषा समझाया जाना चाहिए। संस्कृति का निर्माण करें ताकि पुरुषों और महिलाओं को समान मानने के लिए एक मानसिकता विकसित की जा सके , स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में परिवार में प्रासंगिक पाठ्यक्रम हों , मनोवैज्ञानिक कक्षाओं का संचालन किया जाए ताकि घरेलु हिंसा पर रोक लग सके ।