सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की क्षमता बढ़ा सकते है। ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार कहानी, तो रिकॉर्ड करें फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

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वाराणसी के आर्य महिला पीजी कॉलेज में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान 25 छात्राओं ने रक्तदान किया। महाविद्यालय की कार्यकारी प्राचार्य प्रो. बिंदु लाहिड़ी ने कहा कि रक्तदान के लिए सभी को आगे आना चाहिए। कार्यक्रम अधिकारी व संयोजक डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित ने कहा कि रक्तदान महादान है, हमारा एक यूनिट रक्त किसी को जीवन दे सकता है। डॉ. विनीता ने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन पर रक्तदान कर सकता है।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ जीवदास शाहू आम के पौधों में लगने वाले रोगों का उपचार कैसे करें इसकी जानकारी दे रहे है । विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...

महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज (जयपुर) की स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं दूरबीन शल्य क्रिया विशेषज्ञ प्रो. फरेंद्र भारद्ववाज ने कहा कि बार-बार गर्भपात और गर्भाशय की टीबी से यूट्रस (बच्चेदानी) चिपक सकता है। इससे माहवारी कम अथवा समय से पहले बंद हो सकती है। इससे बांझपन हो सकता है। हालांकि इसका इलाज करके इसे सामान्य अवस्था में लाया जा सकता है।उन्होंने इंडियन एसोसिएशन ऑफ गाइनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (आईएजीई) तथा वाराणसी आब्स एन्ड गायनी सोसायटी (वीओजीएस) की ओर से होटल ताज में आयोजित काफ्रेंस उन्होंने कहा कि यूट्रस चिकपने की अवस्था पर प्रजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि स्त्री रोग से जुड़ी समस्याओं में करीब पांच से दस फीसदी महिलाओं में यह समस्या देखी जा रही है। इसको शुरूआती स्टेज में पहचानकर गंभीर अवस्था में पहुंचने से रोका जा सकता है। सम्मेलन में आईएजीई के अध्यक्ष डॉ पण्डित पालस्कर ने कहा कि दूरबीन से ऑपरेशन का मतलब बिना टांका का ऑपरेशन होता है। इससे बच्चेदानी की समस्या का निदान आसानी से हो जाता है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ अतुल गनात्रा ने कहा कि दूरबीन से ऑपरेशन अत्याधुनिक तकनीक है। यह सुविधा देश के हर नागरिक को मिलनी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर को बेहतर प्रशिक्षण मिलना चाहिए और आधुनिक व गुणवत्तापूर्ण उपकरण होना चाहिए।

भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता लाना जरूरी है। मातृभाषा में शिक्षा अर्जन आसान और सार्थक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी इसकी संस्तुति की गई है। बीएचयू के वाणिज्य संकाय में इग्नू के वीसी प्रो. नागेश्वर राव ने अतिथि व्याख्यान के दौरान यह बातें कहीं। वाणिज्य शिक्षा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभाव विषय पर व्याख्यान में अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग व संकाय प्रमुख प्रो. एचके सिंह ने आत्मनिर्भर भारत अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूरक बताते हुए प्रत्येक विश्वविद्यालय को विशेष शिक्षा क्षेत्र के रूप में परिवर्तित करने का सुझाव दिया। मुख्य अतिथिं प्रो. नागेश्वर राव ने इसके बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति से किसी भी छात्र को निराशा नहीं होगी। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षण मण्डल के डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ही हमारी प्राचीन शिक्षा नीति है। संचालन एवं आभार ज्ञापन प्रो. अखिल मिश्रा ने किया। इस दौरान प्रो. आशा राम त्रिपाठी, प्रो. केके जायसवाल, प्रो. ओपी सिंह, प्रो. एफबी सिंह, डॉ. अवधेश आदि थे।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ गाइनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स (आईएजीई) तथा वाराणसी आब्स एन्ड गायनी सोसायटी (वीओजीएस) की ओर से तीन दिवसीय कांफ्रेंस शुरू हुआ। पहले दिन कांफ्रेंस का विषय 'स्त्री रोगों का दूरबीन से ऑपरेशन एवं उपचार' था। विशेषज्ञों ने बताया कि स्त्री रोगों में दूरबीन से ऑपरेशन होने से क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। इसमें दर्द कम होता है और जल्द रिकवरी होती है। इस मौके पर मुंबई से आए रोहन पॉलसेतकर ने कहा कि लाइफ स्टाइल में बदलाव के कारण स्पर्म की गुणवत्ता घट रही है। सम्मेलन का शुभारंभ एक स्त्री रोगी के दूरबीन से ऑपरेशन से शुरू हुआ। इसके साथ ही न्यू लाइफ हॉस्पिटल में स्त्री रोगी के ऑपरेशन का सजीव प्रसारण हुआ, जिसे आयोजन स्थल पर भी दिखाया गया। आयोजन समिति की अध्यक्ष डॉ. नीलम ओहरी ने बताया कि बांझपन, अल्ट्रासाउंड, एम्ब्रियोलोजी तथा व्यक्तिगत हस्त प्रशिक्षण पर आधारित कार्यशालाएं भी हुई। राष्ट्रीय संयोजक डॉ अतुल गनात्रा और राज्य समन्वयक डॉ. श्रीकांत ओहरी के नेतृत्व में लाइव सर्जरी हुई। वर्कशॉप में भ्रूण विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बांझपन के विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श हुआ। डॉ. सीमा पांडेय और डॉ लतिका अग्रवाल की अध्यक्षता में विशेषज्ञों ने फर्टिलिटी साइकिल में चुनौतियों को दूर करने के लिए उपायों पर चर्चा की। अल्ट्रासाउंड कार्यशाला में स्त्री रोगों और बांझपन पर चर्चा की। कार्यशाला में डॉ. दीपक लिम्बाचिया, डॉ. कल्याण बारमेड, डॉ. कुरियन जोसेफ, डॉ. पण्डित पालस्कर, डॉ. प्रशांत मंगेसिकर आदि ने विचार रखे।