जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है? इस बारे में बचपन मनाओ सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.
हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए...
दिघवारा प्रखंड से अजय कुमार कि रिपोर्ट।कालाजार के नए मरीजों की खोज शुरू, प्रभावित गांवों में आशा कार्यकर्ताएं करेंगी सर्वे: कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत विभाग की ओर से प्रभावित गांवों में साल में दो बार कराया जाता है छिड़काव: सिविल सर्जन कालाजार का लक्षण दिखते ही चिकित्सक से करें संपर्क, नि:शुल्क जांच की है व्यवस्था: डॉ दिलीप वर्ष 2021 से 23 तक मिले मरीजों के आधार पर प्रभावित गांवों में चलाया जाएगा अभियान: छपरा, कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में कालाजार के नए रोगियों की खोज के लिए शनिवार से अभियान की शुरुआत हो गई है। सिविल सर्जन डॉ सागर दुलाल सिन्हा ने बताया कि आशा कार्यकर्ताएं कालाजार प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर सर्वे करेंगी और कालाजार के लक्षण वाले मरीजों को चिह्नित करते हुए उन्हें जांच के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल रेफर करेंगी। साथ ही, उन मरीजों की भी जांच की जायेगी जो पूर्व में कालाजार की बीमारी से ग्रसित रहे हो, क्योंकि कई मामलों में कालाजार के मरीजों के दोबारा से इस बीमारी से ग्रसित होने की संभावना रहती है। हालांकि, कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के तहत विभाग की ओर से प्रभावित गांवों में साल में दो बार छिड़काव कराया जाता है। लेकिन उसके पूर्व कालाजार मरीजों के लिए खोजी अभियान चलाया जाता है। ताकि किसी भी स्तर पर चूक न हो सके। त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना हो सकता है पीकेडीएल के लक्षण: डॉ दिलीप जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि इस अभियान में कालाजार के छुपे हुए मरीजों को चिह्नित किया जायेगा। ताकि, उनका समय से इलाज शुरू किया जा सके। उन्होंने बताया कि 15 दिनों से अधिक समय तक बुखार का होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। इस बीमारी के अन्य लक्षणों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि भूख की कमी, पेट का आकार बड़ा होना कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। जिन्हें बुखार नहीं हो लेकिन उनके शरीर की त्वचा पर सफेद दाग व गांठ बनना पीकेडीएल के लक्षण हो सकते हैं। जो पूर्व के कालाजार के मरीजों से अधिकांशतः पाया जाता है। इसलिए कालाजार से ठीक हो चुके मरीजों को भी जांच कराना अनिवार्य है। ताकि, उन्हें पीकेडीएल के प्रभाव से बचाया जा सके। आशा कार्यकर्ताओं को दी गई है लक्षणों की पहचान की जानकारी: जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार सुधीर कुमार ने बताया, इस अभियान के लिए कुल 927 आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। जिसमें उन्हें कालाजार और पीकेडीएल के लक्षणों की पहचान की विस्तार से जानकारी दी गई है। जिसका प्रसार संक्रमित बालू मक्खी द्वारा होता है। यह परजीवी बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो परजीवी स्वस्थ व्यक्ति के अंदर प्रवेश कर जाता है। इस प्रकार यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। इस बीमारी में दो हफ्तों से ज्यादा बुखार रहता है। उन्होंने बताया कि कालाजार के संदिग्ध रोगी की खोज कर ससमय जांच एवं उपचार करवाना जरूरी है। मरीजों को मिलती है पारिश्रमिक क्षतिपूर्ति राशि: वीडीसीओ वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी (वीडीसीओ) अनुज कुमार ने बताया कि 2021 में कालाजार के 222 मरीज मिले थे। वहीं, 2022 और 2023 में क्रमशः 119 और 90 मिले। जो विभाग के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम रहा। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा कालाजार रोग ग्रसित सभी मरीजों को पारिश्रमिक की क्षतिपूर्ति राशि दी जाती है। योजना के तहत 6600 रुपये तथा केंद्र सरकार की ओर से 500 रुपये यानी कुल 7100 रुपये भुगतान करने का प्रावधान है। वहीं, पीकेडीएल के मरीजों को सरकार द्वारा 4 हजार रुपए की श्रम क्षतिपूर्ति राशि भी दी जाती है। कालाजार के निम्न लक्षण: बुखार अक्सर रुक-रुक कर या तेजी से तथा दोहरी गति से आना, भूख लगना, वजन में कमी जिससे शरीर में दुर्बलता, कमजोरी, त्वचा सूखी, पतली और शुष्क होती है तथा बाल झड़ने लगते हैं। इस बीमारी में खून की कमी बड़ी तेजी होने लगती है। गोरे व्यक्तियों के हाथ, पैर, पेट और चेहरे का रंग भूरा हो जाता है। इसी से इसका नाम कालाजार पड़ा अर्थात काला बुखार पड़ा है।
नयागांव स्टेशन स्थित शहीद राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा के पास प्रशासन क्यों नहीं करती है झंडोत्तोलन ? क्यों भूलते जा रहे हैं लोग शहीदों की कुर्बानी सोनपुर कोर्ट । सोनपुर अनुमंडल प्रशासन 26 जनवरी गणतंत्र दिवस और 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भी शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह को याद नहीं करते हैं। बता दे कि शहीद राजेंद्र प्रसाद सिंह सोनपुर अनुमंडल के वहैरवागाछी नयागांव के निवासी थे। जिनका जन्म 4 दिसंबर 1924 को हुआ था। उन्होंने 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय के सामने यूनियन जैक के झंडा उतार कर अपने देश का तिरंगा झंडा फहराने के दौरान सात क्रांतिकारी छात्र अंग्रेजों के गोली का शिकार होकर शहीद हो गए थे लेकिन तिरंगे झंडे को झुकना नहीं दिया और उस स्थल पर तिरंगा झंडा गार दिया । उस वक्त उनकी उम्र मात्र 18 वर्ष था। इनका 7 शहीदों के साथ पटना सचिवालय के सामने स्मारक है ।अंग्रेजों की गोली से सातों एक साथ शहीद हुए थे । शहीद राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा नयागांव बाजार के स्टेशन परिसर के पास लगी है। इस स्थल के पास लाइट तो लगी है लेकिन यह मुक दर्शक बनी हुई है । लगी हुई लाईट को जलाने की जरूरत है । शहीद राजेन्द्र प्रसाद के प्रतिमा पर जहां स्थानीय लोग अपने स्तर से समय-समय पर उन्हें याद करते हैं लेकिन अनुमंडल प्रशासन उनकी प्रतिमा की पूजा करने तथा 26 जनवरी और 15 अगस्त को झंडोत्तोलन तक करने की जरूरत नहीं समझती। यह शहीदों के लिए अपमान करने जैसा है । अगर अनुमंडल प्रशासन को झंडोत्तोलन का कार्य क्रम में समय नहीं मिलता तो प्रखंड स्तर के पदाधिकारी को भेज कर शहीद के प्रतिभा के समक्ष झंडोतोलन करवाया जा सकता है । ऐसी व्यवस्था करने के लिए अभी वक्त है । अगर भारतीय प्रशासनिक सेवा के आए युवा अनुमंडल पदाधिकारी सोनपुर निशांत कुमार विवेक चाहे तो नयागांव बाजार स्थित शहीद राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा की पास गणतंत्र दिवस परझंडोत्तोलन करने की व्यवस्था कर सकते हैं। यह शहीदों के सम्मान के लिए जरूरी है क्योंकि यह देश के लिए अपनी सीना तानकर सचिवालय के समक्ष अंग्रेजों की गोली खाए थे। आजादी के बाद से विगत कुछ वर्षों से लोग शहीदों को भूलते जा रहे हैं। यहां तक की अब सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय में भी उनकी फोटो फ्रेम लगाकर उन्हें याद नहीं कर रहे हैं । जिन शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी है उनका एक ही सपना था कि आने वाली पीढ़ी को अंग्रेजों के गुलाम व अत्यचार से मुक्ति मिले और अत्याचारों और शोषण उनपर नहीं हो और उन्होंने अंग्रेजों के कोड़े खाते -खाते शरीर को लहूलुहान करते हुए भारत माता के रक्षा के लिए अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी इतना ही नहीं अग्रेजो के गोली खाकर देश के लिए प्राणों को न्यौछावर कर दिया लेकिन उन्हें अब धीरे-धीरे उनके नाम, उनकी यादें ,उनके किए गए कार्य को लोग भुलते जा रहे हैं और वैसे लोगों को याद कर रहे हैं जिनके शरीर में दाग ही दाग है। इस गंभीर समस्याओं को हर भारतवासियों को सोचने समझने और चिंतन करने की जरूरत है।
श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व संध्या पर सज गया सोनपुर मंदिर से घर घर तक दीपोत्सव जैसा उत्साह सोनपुर । 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित मठ मंदिरों तथा घर घर में रविवार से उत्सव का माहौल कायम हो गया है। सर्वत्र जय श्री राम का गगनभेदी नारे के साथ-साथ रामचरित मानस तथा हनुमान चालिसा का पाठ भी मंदिर से लेकर घर घर में भजन कीर्तन किया जा रहा है। मंदिरों में हवन, अष्टयाम के साथ जय श्री राम जय श्री राम का भजन कीर्तन हो रहा है। कहते है कि भगवान श्रीराम हरिहरक्षेत्र सोनपुर के भूमि पर पधार चुके हैं। उनकी चरण धूली से यह क्षेत्र पवित्र हो चुका है। तमी तो इस क्षेत्र के नर नारी युवक-युवतियां बच्चे छात्र छात्राये सबके सब भगवान श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर एक दिन पूर्व से ही सर्वत्र स्वच्छता का वातावरण कायम कर दिया गया है। बाबा हरिहरनाथ मंदिर ,लोक सेवा आश्रम स्थित सूर्य-शनिदेव मंदिर हनुमान मंदिर ,गौरी - शंकर मंदिर भरपुरा, दक्षिणेश्वरी काली मंदिर, श्री गजेन्द्रमोक्ष नौलखा मंदिर, गजेंद्रनाथ मंदिर गंगाजल, राधाकृष्ण मंदिर ,जड़भरत मंदिर बैजलपुर ,रामजानकी मंदिर पहलेजा घाट सहित अन्य मठ मंदिरों में खोरंग रोगन के अलावा विभिन्न प्रकार के बल्बों व शुद्ध घी के दीये जलाकर मंदिर को सुशोभित कर भगवान श्री राम के प्राण-प्रतिष्ठा के पूर्व संध्या से ही दिपोत्सव का माहोल कायम कर दिया गया है। गौड़ी- गंगा और श्यामली नारायणी के पावन संगम पर बना नमामि गंगे घाट, पुलघाट ,सवाईच से कालीघाट तक 22 जनपरी को भगवान श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा के दिन यानी सोमवार को व्यापक रूप से महादीपोत्सव मनाने की व्यवस्था पूरी कर ली गयी है। सर्वत्र स्वच्छता अभियान चलाया गया है। सोमवार को अयोध्या में भगवान श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा के बाद घर घर तक प्रसाद पहुंचाने की व्यवस्था किया गया है। घर घर मगवान राम का फोटो तथा कैलेन्डर लगाये गये है। हरिहरक्षेत्र सोनपुर का चप्पे- चप्पे राममय हो गया है। घर घर की महिलाये भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा पर एक से बढ़कर एक गीत बनाकर सामुहिक रूप से गायनकर रही है और रहरह कर दिल खोलकर जय श्री राम की नारे बुलंद कर रही हैं ।
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