निर्माणधीन मकान से गिरा मजदूर हुई मौत। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
भागवत कथा के पाँचवें दिन लोगों के मध्य कृष्ण के बाल रूप की चर्चा की। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
पुलिस को सूचना मिलते ही अज्ञात शव को पुलिस ने किया बरामद। शव पहचान अभी नहीं हो पाई है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने सम्राट चौधरी का भव्य स्वागत किया। इस मौके पर आगामी चुनाव में भाजपा की भुमिका पर चर्चा की गई। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
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बिहार राज्य सारण जिला के सोनपुर से साक्षी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं कि जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब प्रभु अवतार लेकर अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की रक्षा करते हैं। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। आज की युवा पीढ़ी धन कमाने में लगी हुई है लेकिन अपनी कुल धर्म और मर्यादा का पालन बहुत कम कर रहे-- जगद्गुरु लक्ष्मण आचार्य सोनपुर । हरिहर क्षेत्र सोनपुर के श्री गजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् नौलखा मन्दिर में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथा व्यास जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने श्री गजेन्द्र मोक्ष की कथा में भजन "हे गोविन्द राख्यो शरण अब तो जीवन हारे" सुनाते हुए कहा कि हमारे ईश्वर तो भक्त के हृदय से पुकारते हीं रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।भगवान बलहीन भक्त की रक्षा करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं, बलवान दुष्ट के लिए नहीं। समर्थ बलवान हो परन्तु भक्ति नहीं तो ईश्वर की कृपा नहीं हो सकता। वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ तथा अंहकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह भी बताया कि यह धनसंपदा क्षणभंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करो। अहंकार, घमंड, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। यदि हम संसार में पूरी तरह मोहग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते है तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी। कथा के दौरान वामन अवतार की झांकी दिखाई गई और 'तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे रे झोली' एवं श्रीवामन भगवान तेरी जय हो पर श्रद्घालु भाव विभोर हो गये। तत्पश्चात श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। इसमें श्रद्धालु जमकर थिरके। इस मौके पर पूरा कथा परिसर भगवान श्री कृष्ण के जयकारों तथा नंद के आनन्द भयो, जय कन्हैयालाल की जय से गूंजायमान हो उठा। कथा के दौरान श्री स्वामी जी ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब कंस ने सभी मर्यादाएं तोड़ दी तो श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण से संस्कार की सीख लेने की बात कहा। भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जानते थे कि वह परमात्मा हैं उसके बाद भी वह अपने माता पिता के चरणों को प्रणाम करने में कभी संकोच नहीं करते थे। यह सीख में भगवान श्रीकृष्ण से सभी को लेनी चाहिए। आज की युवा पीढ़ी धन कमाने में लगी हुई है लेकिन अपनी कुल धर्म और मर्यादा का पालन बहुत कम कर रहे हैं।बाल कृष्ण की मनोरम झांकी में समाजसेवी लालबाबू पटेल, संस्थान प्रबंधक नन्द कुमार बाबा, दिलीप झा और नारायणी का योगदान सराहनीय रहा।
