उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से गजेंद्र कुमार सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानता का पहला कारण निरक्षरता है, चाहे वह पुरुषों में हो या महिलाओं में। दोनों तरफ से अगर कोई अनपढ़ है तो महिलाओं को समान दर्जा देना मुश्किल है। जबकि वह शोषण नहीं करता है, वह महिलाओं को अपना समान अधिकार देता है, अगर महिलाओं को शिक्षा की शक्ति नहीं मिलती है, तो महिलाएं खुद पीछे रह जाती हैं। बदलते युग में आज लोग लड़कियों को शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। लड़कियाँ शिक्षित हो रही हैं। लड़कियाँ भी शिक्षित होने के बाद अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। लेकिन भारत में, गाँव घर की संरचना महिलाओं को घर के भीतर एक द्वितीयक दर्जा देती है। यह सामाजिक संरचना महिलाओं को घर के भीतर एक द्वितीयक दर्जा देती है। इसके लिए सामाजिक ढांचे की संरचना भी जिम्मेदार है, फिर भी महिलाओं को सरकार द्वारा सभी अधिकार दिए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि पेड़ों की कटाई अधिक गर्मी पड़ने का सबसे बड़े कारणों में से एक है।पहले पेड़ों की संख्या अधिक थी। फलदार वृक्ष थे। इसके साथ देखा जाए तो सभी बड़े पेड़ जैसे पीपल बरगद, पाकड़, गुलार, छायादार पेड़ अधिक हुआ करते थे। अब ऐसे पेड़ बहुत कम हो गए हैं। बड़े आकर के वृक्ष में अधिक ऑक्सीजन छोड़ने और अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता होती है.ऐसे पेड़ पर्यावरण के लिए अच्छे माने जाते हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

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उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि बरसात का मौसम आते है सरकार के सभी विभाग वृक्षारोपण को लेकर सतर्क हो जाते हैं। जगह-जगह पर मानक के अनुसार वृक्ष लगाए जाते हैं। इसके लिए बजट जारी किया जाता है। सवाल ये है कि क्या बजट लेने के लिए लोग वृक्षारोपण करते हैं या सही में वृक्ष लगाने के लिए? हर वर्ष लाखों करोड़ों पौधे लगाने के बाद कितने पौधे बचते हैं,ये देखना भी जरुरी है।क्योंकि जिस तादाद में वृक्षारोपण हर साल लिया जाता है,उतने वृक्ष वर्तमान में दिख नहीं रहे हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि जिन जगहों पर जल की किल्लत है जल का महत्त्व वही लोग समझ सकते हैं। लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है ताकि उन्हें पीने के लिए पानी की एक बूंद मिल सके। जल संरक्षण के लिए सरकार की तरफ से मुहीम चलाया जाता है और समय-समय पर विज्ञापन दिए जाते हैं। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी विज्ञापन दिए जाते हैं, लेकिन विज्ञापन से कितने लोग अब तक जागरूक हुए हैं?लोग सन्देश सुनते तो जरूर हैं,मगर पहल नही कर पाते हैं। वाराणसी जनपद में लोग धड़ल्ले से बोरिंग करवा रहे हैं,जिससे जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जल संरक्षण के महत्त्व के प्रति लोगों को जागरूक होना होगा और सरकार को सख्ती से जल संरक्षण हेतु कार्य करना चाहिए। देश के नागरिक को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की जरूरत है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि देश की आजादी के बाद से ही महिलाओं के अधिकार सुर्खियों में रहे हैं जब कानून बने हैं और संविधान लागू हुए हैं। चुनाव के दौरान सभी राजनितिक पार्टियां महिलाओं के लिए लुभावने वादे करते हैं। मगर महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम नही उठाए जाते हैं। महिलाओं को कुटीर लघु उद्योग में और सब्सिडी मिलनी चाहिए। साथ ही उन्हें आसानी से लोन मिलनी चाहिए। प्राइवेट स्कूलों में लड़कियों के फिस मे छूट का भी प्रावधान होना चाहिए।महिलाओं को सिर्फ घर तक ही सिमित नही रहनी चाहिए ,बल्कि बाहर निकल कर अपने हक़ की लड़ाई लड़नी चाहिए विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

गर्मी की चुनौतियां और समाधान, गर्मी से उत्पन्न समस्याओं और उनके समाधान की जानकारी। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए व्यावहारिक सुझाव।

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

दोस्तों नई सरकार का गठन हो गया है। ऐसे में सरकार से आपकी क्या अपेक्षाए हैं, क्या आपको भी लगता है कि लोकतंत्र के संस्थानों के उनके नियमों के अनुसार ही काम करना चाहिए या सरकार का रुख ठीक है कि वह चुनकर सत्ता में आए हैं, तो अब उनकी मर्जी है कि वे कैसे चलाते हैं। इस मसले पर अपनी राय रिकॉर्ड करें मोबाईलवाणी पर

मानव जीवन में डॉक्टर्स की भूमिका बहुत खास है। उन्हें भगवान से कम नहीं समझा जाता है। क्योंकि भगवान की तरह डॉक्टर भी एक व्यक्ति को नया जीवन देने में भूमिका निभाते हैं। छोटी-छोटी से समस्या हो या गंभीर बीमारी, डॉक्टर ही एक ऐसा व्यक्ति है जिसके पास मानव शरीर की सभी परेशानियों का उपचार है।एक जुलाई को ही डॉक्टर दिवस मनाने की एक खास वजह भी है. महान चिकित्सक डॉक्टर बिधान चंद्र रॉय का जन्मदिन 1 जुलाई 1882 को हुआ था. इतना ही नहीं एक जुलाई 1962 को ही डॉ बिधान का निधन हुआ था. इसलिए तब से डॉक्टर को सम्मान देने के रूप में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। साथ ही हमारे देश में स्वास्थ्य को एक सेवा के रूप में देखा जाता है और हमारे चिकित्सा पेशेवरों ने अथक और निस्वार्थ भाव से काम करके अपने देश की सेवा भाव एवं सेवा परमो धर्म की परंपरा का पालन किया है. यही एकमात्र कारण था कि हमारे कोविड योद्धा मौके पर खड़े हुए और निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्य का पालन किया.तो आइये दोस्तों हम सब मिलकर चिकित्सक के कार्य की सराहना और मानव जीवन में उनकी भूमिका का सम्मान करें। मोबाइल वाणी की ओर से आप सब को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की हार्दिक बधाई।