बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर के मरवान पंचायत से रीता कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं की दिव्यांगता के बहुत से कारण होते हैं और नीलिमा की कहानी सुन कर अच्छा लगा और इनके गाँव में भेदभाव में परिवर्तन आ रहा है।

बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर के मरवान पंचायत से वीरांगनी मोबाइल वाणी के माध्यम से बोल रही हैं की नीलिमा की कहानी बहुत अच्छी लगती है और इसे ये बार-बार सुनती हैं और इनके गाँव में भी एक दो विकलांग है जो अपने बलबूते सभी काम करते हैं।

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बिहार राज्य से अंजलि कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं की मेरी पंचायत मेरी शक्ति कार्यक्रम से पांच साल से जुडी हुई हैं और बोल रही हैं की दिव्यांग लोग को कभी भी अकेलापन महसूस नहीं होने देना चाहियें और वो जो करना चाहते हैं हमें उन्हें पूरा सहयोग करना चाहियें और जो भी उनमे कमी है उसे पूरा करना चाहियें और दिव्यांग को भी हक़ और हिम्मत के साथ जीने का अधिकार होना चाहियें

बिहार राज्य से वीरांगनी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बोल रही हैं की किसी भी दिव्यांग पर ताना नहीं मारना चाहियें बल्कि उन्हें हौसला देना चाहियें जिससे की वो आगे बढ़ सके और एक दिव्यांग आगे बढ़ेगा तो दूसरे को देख कर उसे भी हौसला मिलेगा और जिस तरह से सभी को अधिकार होता है उसी तरह दिव्यांग को हरेक चीज का अधिकार होना और मिलना चाहियें

बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिले से साक्षी कुमारी मेरी पंचायत मेरी शक्ति के माध्यम से यह कहती हैं कि उन्हें नीलिमा की कहानी बहुत ही अच्छी लगती है। उन्होंने कहा कि आजकल जिस तरह से समाज में विकलांग लड़की हो या लड़का पुरुष हो या महिला सहायता करने के लिए कोई भी आगे नहीं होता। लेकिन इस कार्यक्रम में विकलांग लड़की की सहायता की जा रही है। वह बहुत ही अच्छा लगता है

बिहार राज्य के मुज़फ़्फ़रपु जिले के मरवण पंचायत से रीता कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह कहती हैं कि विकलांग लड़के हो या लड़की हमें इन्हे हर चीजों में हौसला देनी चाहिए। जिससे यह कुछ भी कर सके। हमें कभी भी इनके साथ दुर्व्यवहार नहीं करनी चाहिए। बहुत से लोग विकलांग को दोस्त बनानां नहीं चाहते है

बिहार राज्य के वैशाली जिला से मोबाइल वाणी के माध्यम से ये बता रही हैं की दिव्यांग लोग को अपना घर परिवार चलाने के लिए बहुत परिश्रम करना पड़ता है और उनके घर में खाने-पिने का भी समस्या होता है

बिहार राज्य से अंजलि कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बोल रही हैं की दिव्यांग लोग को हमेशा आगे बढ़ने के लिए हिम्मत और हौसला देना चाहियें उन्हें कभी दिव्यांगता का अनुभव नहीं होने देना चाहियें जैसे की हम एक वयक्ति हैं उसी तरह वो भी एक वैयक्ति हैं जिस तरह हम पढ़ाई करते हैं उसी तरह दिव्यांग भी पढ़ाई कर सकते हैं जिस तरह हमे खुल कर जीने का अधिकार है मनचाहा खाना खाना कपडा पहनना पढ़ाई करना और नौकरी करना उसी तरह दिव्यांग भी कर सकते हैं अगर हम सोचते हैं की दिव्यांग कोई काम नहीं कर सकते हैं तो ये गलत है जैसे की हम सामान्य होकर भी कोई नौकरी नहीं करते हैं और दिव्यांग होकर भी वो नौकरी करते हैं तो लोग हमारी तारीफ ना करके उनकी तारीफ करते हैं तो ऐसे में सामान्य लोग अपने आप को कमजोर और बदनसीब समझते हैं।

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