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जिला मधुबनी,से रामानंद सिंह जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि मधुबनी जिले में स्वास्थ्य विभाग की भी अजीबो गरीबो दास्ताँ है।कहीं डॉक्टर है तो कही कम्पाउंडर नहीं है और कहीं कम्पाउंडर है तो डॉक्टर नहीं और अगर दोनों है तो दवा का अभाव रहता है।इसी परिप्रेक्ष में केन्द्र सरकार के प्रायोजित कार्यक्रम में भी जब डॉक्टर नदारत रहा करते है अस्पताल से तो अन्य दिनों की बात ही क्या करना।प्रधानमंत्री सुरक्षा मातृत्व योजना के अंतर्गत पिछले दिनों अंधराठाढ़ी स्थित रेफरल अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परिक्षण किया जाना था।लेकिन जाँच के दौरान अस्पताल में ना तो डॉक्टर दिखे और ना ही लोगो का सही तरीके से स्वास्थ्य परीक्षण ही हुआ।क्योंकि डॉक्टर थे ही नही।और जो डॉक्टर आये थे वो अपना हाजिरी बना कर निकल गए थे।शिविर में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी समेत आधे दर्जन चिकित्सक अनुपस्थित पाए गए।अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पाँच काउन्टर बनाया गया था। फिर भी लोगो के स्वास्थ्य की जाँच नहीं हो सकी । नवजात की जाँच महिला महिला चिक्तिसक को करना था जबकि महिला चिकित्सक दिन में एक बजे के बाद गायब पायी गयी।

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राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के उद्देश्य से आयुष विभाग स्थापित किया गया है।और सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर आयुष के डॉक्टर नियुक्त किये गएँ। राज्य में आयुष चिकित्सकों की बहाली किये लगभग 8 से 9 साल हो गएँ हैं लेकिन अभी तक सरकारी अस्पतालों में बिहार सरकार द्वारा ना तो आयुष का दवा उपलब्ध करवाई गई है और ना ही आयुर्वेदिक या होम्योपैथ की।बावजूद इसके विडम्बना यह है कि सरकारी अस्पतालों में आयुष डॉक्टरों से एलोपैथी का इलाज कराया जाता है।दोस्तों , क्या ऐसे में सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिल पायेगी ? आखिर क्या वजह है कि आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति के इतने साल बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई गई है ? श्रोताओं, सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेदिक दवाइयां उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों एवं उनके परिजनों को इलाज़ के दौरान किस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है ? दोस्तों ,सरकारी अस्पतालों की मौजूदा हालात में सुधार लाने हेतु क्या आपने अपने स्तर पर कोई पहल की है? आपके अनुसार सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिल सके इसके लिए सरकार को किस तरह की कठोर कदम उठाने की जरुरत है ? साथ ही इसमें सुधार लाने में समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए ?