चंदू जी,मधुबनी के खुटौना प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से गुरु-शिष्य के बीच सबंध को बताते हुए कहते है कि प्राचीन समय मे गुरु शिष्य परंपरा काफी विस्तृित थी,शिष्य अपने गुरु के आश्रम मे जाकर विद्या अध्यन करते थे साथ गुरुजी भी अपने बच्चो की तरह अपने शिष्य को मानते थे वे बच्चो को दिनचर्चा मे कठोर अनुसाशन मे रहना सिखाया करते थे परंतु अाज के अाधुनिक शिक्षा मे अनुसाशन का घोर अभाव देखा जा रहा है.अाज शिक्षा ग्रहण करने के लिए सारी सुविधाए मौजूद है परंतु अनुसाशन हीनता एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। शिक्षक-छात्र एक दूसरे के प्रति अपने कर्तव का निर्वहन नही करते है.इसलिए समय अनुसार अब गुरु-शिष्य परंपरा का पुनः शुरुअात करना चाहिए।दोस्तो अगर आप भी इसी तरह की ख़बरें हमारे साथ बांटना चाहते है तो कॉल करे,नि:शुल्क नंबर 08800984861 पर।